रायपुर साहित्य उत्सव: देशभर के साहित्यकारों का लगा मेला, पहले दिन चार सत्रों में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

रायपुर साहित्य उत्सव शुक्रवार 13 जनवरी से शुरू हो गया। पहले दिन प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि पद्मश्री स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे को समर्पित रहा ओपन माइक का मंच।

Updated On 2026-01-23 19:20:00 IST

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 कार्यक्रम

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी रायपुर में साहित्य और विचारों का सबसे बड़ा महोत्सव 'रायपुर साहित्य उत्सव 2026' आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में भव्य रूप से शुरू हुआ। उद्घाटन राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन देशभर के साहित्यकारों, कलाकारों और विचारकों को एक ही मंच पर ले आया।

उद्घाटन समारोह: साहित्य, विचार और परंपरा का संगम
उद्घाटन कार्यक्रम विनोद कुमार शुक्ल मंडप में आयोजित हुआ, जहां उपसभापति हरिवंश, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और कई नामी साहित्यकार शामिल हुए। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिकाएं और विभिन्न साहित्यिक कृतियों का विमोचन किया गया।


उपसभापति हरिवंश का संबोधन: 'एक लेखक भी दुनिया बदल सकता है'
उपसभापति हरिवंश ने छत्तीसगढ़ की साहित्यिक विरासत को नमन करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का कार्य करता है। उन्होंने कबीर, मैथिलीशरण गुप्त और भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि, 'एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया बदल सकते हैं।'


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय: 'रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य का महाकुंभ'
मुख्यमंत्री ने कहा कि, यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला मील का पत्थर है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी साहित्यकारों- लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुक्तिबोध आदि का उल्लेख करते हुए साहित्य की सामाजिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि, आज की युवा पीढ़ी में साहित्य के प्रति बढ़ता झुकाव उत्साहजनक है।

छत्तीसगढ़ी कविता और लोकगीतों के विशेष सत्र
प्रदेश की बोली-बानी को संजोते हुए छत्तीसगढ़ी कवि रामेश्वर वैष्णव, शशि सुरेंद्र दुबे, मीर अली मीर सहित कई स्थानीय कलाकारों ने मंच पर प्रस्तुति दी। लोकगीत सत्र में डॉ. पी.सी. लाल यादव और शकुंतला तरार जैसे लोकधुनों के धरोहर भी शामिल हुए।


ओपन माइक मंच पर पहले दिन चार सत्रों का आयोजन
रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि पद्मश्री स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे को समर्पित ओपन माइक मंच पर पहले दिन चार सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें 75 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सृजनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। इस मंच पर कविता, कहानी, गायन, वादन, सामूहिक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य जैसी विविध विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।


पड़ोसी राज्यों के प्रतिभागी भी हुए शामिल
ओपन माइक सत्र में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह विशेष मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सुसज्जित किया गया था, जहाँ बाँसुरी, गिटार और वायलिन वादन की प्रस्तुतियों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। नन्ही नृत्यांगनाओं ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया, वहीं सरगुजा से लेकर बस्तर तक के युवा कवियों और ग़ज़लकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

वितरित किए गए प्रमाण पत्र
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, महंत कॉलेज के प्राचार्य देवाशीष महंत तथा संयुक्त संचालक, जनसंपर्क इस्मत जहाँ दानी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। ओपन माइक सत्र ने न केवल नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति के प्रति युवाओं के उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा को भी प्रभावी रूप से उजागर किया।


डिजिटल साहित्य : प्रकाशकों के लिए चुनौती पर सार्थक विमर्श
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत “आदि से अनादि तक” थीम पर आयोजित सत्रों की श्रृंखला में अनिरुद्ध नीरव मंडप में एक विचारोत्तेजक चर्चा सत्र संपन्न हुआ। “डिजिटल साहित्य : प्रकाशकों के लिए चुनौती” विषय पर केंद्रित इस सत्र में डिजिटल युग में साहित्य प्रकाशन की बदलती प्रकृति, संभावनाओं और चुनौतियों पर गंभीर विमर्श किया गया।

डिजिटल परिवर्तन पारंपरिकों के लिए चुनौती
सत्र में प्रभात प्रकाशन, दिल्ली के प्रतिनिधि प्रभात कुमार ने डिजिटल माध्यमों के प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि, ई-बुक्स, ऑडियो बुक्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने साहित्य को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के नए अवसर प्रदान किए हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल परिवर्तन के चलते पारंपरिक प्रकाशन मॉडल को नई प्रतिस्पर्धा और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।


डॉ. सुधीर शर्मा रहे सूत्रधार
सत्र के सूत्रधार डॉ. सुधीर शर्मा वैभव प्रकाशन, रायपुर ने डिजिटल तकनीक, कॉपीराइट संरक्षण, पाठकों की बदलती रुचियों और साहित्यिक गुणवत्ता बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर संवाद को आगे बढ़ाया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल माध्यम को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में अपनाकर नवाचार के जरिए साहित्य प्रकाशन को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

Tags:    

Similar News

कांग्रेसियों के साथ मंच पर बृजमोहन: लगने लगीं अटकलें तो बोले-मैं जहां था मरते दम तक वहीं रहूंगा

'वीबी जी राम जी योजना' के खिलाफ कांग्रेस की पदयात्रा: मंत्री टंकराम बोले- कांग्रेस सिर्फ विरोध की पार्टी बनकर रह गई है

श्रीराम मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह: आज कलश यात्रा, 26 को वेदी पूजन और 27 को विराजेंगे भगवान, 28 से 31 जनवरी तक अखंड रामायण

छालीवुड प्रोड्यूसर मोहित साहू ने किया ड्रामा: गिरफ्तारी से बचने के लिए फिनायल पीकर अस्पताल में हुआ भर्ती