मनेंद्रगढ़ में अफसरों और जवानों की कमी: 9 महीने से एडिशनल एसपी का पद खाली, मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने DGP को लिखा पत्र

मनेंद्रगढ़ जिले में 9 महीने से एडिशनल एसपी का पद रिक्त, सुरक्षा व्यवस्था पर खतरा मंडरा रह। मंत्री श्यामबिहारी ने DGP को पत्र लिखकर सुरक्षा कवच देने की मांग की।

Updated On 2026-01-25 15:58:00 IST

मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल 

रविकांत सिंह राजपूत- मनेंद्रगढ़। मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर इन दिनों पुलिसिंग के एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जो आश्चर्यजनक भी है और चिंताजनक भी। यह प्रदेश का संभवतः पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां पिछले 9 महीनों से पुलिस कप्तान और मैदानी अमले के बीच की सबसे मजबूत कड़ी 'एडिशनल एसपी' का पद रिक्त है। हद तो तब हो गई जब गुरुवार रात छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी की गई एडिशनल एसपी की ताजा तबादला सूची में भी इस जिले को नजरअंदाज कर दिया गया। जिले को उम्मीद थी कि इस बार यह 'शून्य' भर जाएगा, लेकिन एमसीबी की झोली फिर खाली रही।


​खाली कुर्सी पर सुरक्षा की कमान
​मई 2025 में तत्कालीन एडिशनल एसपी अशोक वाडेगांवकर की सेवानिवृत्ति के बाद से यह राजपत्रित पद धूल फांक रहा है। जिले में अफसरों और जवानों का भारी अकाल है, लेकिन विडंबना देखिए कि इस 'आधी-अधूरी' टीम ने अपराधों पर लगाम लगाने में वो कर दिखाया जो संसाधनों से लैस जिले नहीं कर पाए।

  • ​निरीक्षक : 50% पद खाली, कई थानों की कमान मजबूरी में 'जूनियर्स' के हाथ।
  • ​उप-निरीक्षक : 60% पद रिक्त, विवेचना और जांच की रफ्तार पर ब्रेक।
  • आरक्षक : 40% पद रिक्त, वीआईपी ड्यूटी और गश्त में पड़ोस के जिलों से मांगना पड़ता है बल।

मंत्री श्यामबिहारी ने लिखी डीजीपी को चिट्ठी


डीजीपी से मांगा 'सुरक्षा कवच'
क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने इस उपेक्षा पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने डीजीपी अरुण देव गौतम को पत्र लिखकर साफ किया है कि अंतर्राज्यीय सीमा से लगे इस संवेदनशील जिले को 'अतिरिक्त प्रभार' या कम अमले के भरोसे छोड़ना जोखिम भरा है। ताजा ट्रांसफर सूची में पदस्थापना न होना, प्रशासन की संवेदनहीनता की ओर इशारा करता है।

​आंकड़े : ​अमले की कमी के बावजूद अपराध दर में 'जादुई' गिरावट

  • 2023: 2251 अपराध दर्ज।
  • ​2025: घटकर केवल 1525 रह गए।
  • ​गिरावट: कुल अपराधों में 7% और संगीन जुर्मों (हत्या, डकैती) में 9.5% की कमी।

​एसपी का 'आग्रह पत्र' फाइलों में दफन?
​एसपी रत्ना सिंह ने स्वीकार किया कि एडिशनल एसपी न होने से प्रशासनिक और रणनीतिक मोर्चे पर खासी दिक्कतें आती हैं। पुलिस मुख्यालय (PHQ) को कई बार 'आग्रह पत्र' भेजे गए, लेकिन नतीजा सिफर रहा। वर्तमान में स्थिति यह है कि त्योहारों या विरोध प्रदर्शनों के दौरान जिले को संभाग या दूसरे जिलों से पुलिस बल उधार मांगना पड़ता है।

​टाइम बम' पर खड़ी सुरक्षा व्यवस्था
​अपराध दर में कमी पुलिस टीम की मेहनत का नतीजा है, लेकिन 60 प्रतिशत तक पदों का खाली होना किसी 'टाइम बम' से कम नहीं है। आधे-अधूरे अमले पर काम का बोझ दोगुना है, जिससे पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर असर पड़ रहा है। आखिर एमसीबी जिले के साथ यह सौतेला व्यवहार कब तक?

Tags:    

Similar News

बुधरी ताती होंगी पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित: दक्षिण बस्तर में पिछले 36 वर्षों से कर रही हैं समाज सेवा

'वीबी जी राम जी योजना' के खिलाफ कांग्रेस की पदयात्रा: मंत्री टंकराम बोले- कांग्रेस सिर्फ विरोध की पार्टी बनकर रह गई है

श्रीराम मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह: आज कलश यात्रा, 26 को वेदी पूजन और 27 को विराजेंगे भगवान, 28 से 31 जनवरी तक अखंड रामायण

छालीवुड प्रोड्यूसर मोहित साहू ने किया ड्रामा: गिरफ्तारी से बचने के लिए फिनायल पीकर अस्पताल में हुआ भर्ती

केंद्रीय बजट को लेकर बीजेपी ने बनाई प्रदेश स्तरीय समिति: अमर अग्रवाल की अगुवाई में 6 सदस्यीय टीम का गठन