मकर संक्रांति पर नर्मदा घाट में उमड़े श्रद्धालु: हजारों लोगों ने किया पुण्य स्नान, हर-हर नर्मदे के जयकारे से गूंजा पूरा इलाका

मकर संक्रांति पर अमरकंटक के नर्मदा घाटों पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे, जहां प्रशासन की कड़ी सुरक्षा और सुव्यवस्थित व्यवस्था के बीच स्नान और पूजा-अर्चना संपन्न हुई।

By :  Ck Shukla
Updated On 2026-01-14 13:38:00 IST

नर्मदा घाट पर मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़

आकाश पवार - पेंड्रा। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर अमरकंटक में माँ नर्मदा के तटों पर आस्था का अद्भुत और विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु घाटों पर पहुंचने लगे और हजारों भक्तों ने पवित्र नर्मदा जल में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया।

ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुआ श्रद्धालुओं का आगमन
सुबह होते ही नर्मदा घाटों पर भारी भीड़ जुटने लगी। दूर-दराज क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने नर्मदा स्नान के बाद मां नर्मदा की पूजा-अर्चना, दीपदान और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। घाटों पर ‘हर-हर नर्मदे’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

मकर संक्रांति का महत्व और श्रद्धालुओं की मान्यता
श्रद्धालु बताते हैं कि मकर संक्रांति पर सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने से यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। नर्मदा स्नान से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम
भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए। घाटों पर पुलिस बल, होमगार्ड, स्वयंसेवकों की तैनाती के साथ-साथ स्नान स्थलों की साफ-सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

अधिकारियों ने किया लगातार निरीक्षण
अतिरिक्त निगरानी के साथ प्रशासनिक अधिकारियों ने घाटों का निरीक्षण किया और श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर स्नान करने की अपील की। स्वास्थ्य विभाग की टीम, एंबुलेंस और रेस्क्यू टीम भी लगातार सतर्क रहीं।

घाट क्षेत्र में रही रौनक और श्रद्धा का माहौल
नर्मदा तट पर लगे अस्थायी दुकानों पर धार्मिक सामग्री, प्रसाद, फूल-माला और दीपदान सामग्री खरीदते श्रद्धालुओं की भीड़ दिनभर बनी रही, जिससे घाट क्षेत्र में लगातार चहल-पहल दिखी।

व्यवस्थाओं से संतुष्ट दिखे श्रद्धालु
शांतिपूर्ण व्यवस्था से खुश श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रबंधन के कारण वे निर्बाध तरीके से स्नान और पूजा कर सके।

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