नगरी में मानवता की अनोखी कहानी: जंगल से भटककर आया और जाली में फँसा हिरण, स्कूली बच्चों ने किया रेस्क्यू
नगरी के उमरगांव में जंगल से भटका एक हिरण कांटेदार तार में फँसा मिला, जहां बच्चों ने साहस और संवेदना दिखाते हुए उसे सुरक्षित बचाया और वन विभाग को सौंपा।
उमरगांव में बच्चों द्वारा बचाया गया घायल हिरण
अंगेश हिरवानी - नगरी। सिहावा क्षेत्र के उमरगांव में मंगलवार की सुबह एक ऐसा मानवीय दृश्य सामने आया, जिसने साबित कर दिया कि आज भी करुणा और संवेदना समाज के मूल में मौजूद है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से भटककर आया एक घायल हिरण स्कूल के मैदान में तार की जाली में फँस गया था। दर्द से तड़पते इस हिरण को देखकर गांव के बच्चों और युवाओं ने बिना झिझक मदद का हाथ बढ़ाया और उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
जंगल से भटका हिरण और बच्चों की तत्परता
स्कूल के मैदान में रोज़ की तरह बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे, तभी उनकी नज़र मैदान की जाली में फँसे एक कोटरी हिरण पर पड़ी। उसका मुँह घायल था और वह बुरी तरह डर गया था। आमतौर पर ऐसी स्थिति में कई लोग दूरी बना लेते हैं, लेकिन उमरगांव के बच्चों और युवकों ने जोखिम उठाते हुए हिरण को धीरे-धीरे तार से मुक्त किया। उन्होंने उसे माध्यमिक शाला भवन में सुरक्षित रखा, ताकि वह और चोटिल न हो।
वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची
घटना की सूचना सामाजिक कार्यकर्ता महेश अग्रवाल ने तुरंत वन परिक्षेत्र बिरगुड़ी और मीडिया को दी। जानकारी मिलते ही उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, गरियाबंद के उपनिदेशक वरुण जैन के निर्देश पर सहायक संचालक राजपूत, वन रक्षक अमित पटेल और अनिल कश्यप सहित रेस्क्यू टीम गांव पहुंची। टीम स्वरा हिरण को सुरक्षित पकड़कर इलाज के लिए वाहन से ले जाया गया।
मानवता की सीख देने वाली घटना
ऐसे समय में जब वन्यजीवों के शिकार और क्रूरता की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं, उमरगांव के बच्चों द्वारा किया गया यह संवेदनशील कदम समाज के लिए प्रेरणा है। ग्रामीणों का मानना है कि प्रकृति और मानव का संबंध केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि करुणा से निभाया जाने वाला रिश्ता है।
बच्चों ने दिया सह-अस्तित्व का संदेश
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि वास्तविक शिक्षा किताबों तक सीमित नहीं होती। कभी-कभी एक स्कूल मैदान ही वह जगह बन जाता है जहां बच्चे मानवता, संवेदना और सह-अस्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण पाठ सीखते हैं और पूरे समाज को भी सिखाते हैं।