महाशिवरात्रि: 15 फरवरी को संध्या 5.06 बजे प्रारंभ होगी चतुर्दशी तिथि

इस साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5:35 बजे समाप्त होगी।

Updated On 2026-02-03 14:38:00 IST

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रायपुर। इस साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5:35 बजे समाप्त होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शिव पूजन का विधान मध्यरात्रि ही है, इसलिए उदया तिथि मान्य नहीं होगी। 15 फरवरी को ही त्रयोदशी-युक्त चतुर्दशी के साथ महाशिवरात्रि मनाई जाएगी और इसी दिन मध्यरात्रि पूजा होगी।

इस दिन सूर्य, बुध, राहु और शुक्र एक साथ मिलकर एक शक्तिशाली चतुर्ग्रही योग बना रहे हैं। इसके अलावा सुबह 7:08 बजे से शाम 7:48 बजे तक, सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इसे ज्योतिष में सबसे शुभ योगों में से एक माना जाता है, जो बाधाओं को दूर करने और सफलता सुनिश्चित करने के लिए जाना जाता है। 15 फरवरी को सुबह 7 बजकर 45 मिनट से लेकर शाम 7 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहने वाला है। इस योग में भगवान शिव की पूजा आराधना करने से हर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। रुद्राभिषेक करने के इच्छुक भक्त सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक कर सकते हैं।

तीन दिन पूर्व प्रारंभहोंगी विवाह रस्में
महाशिवरात्रि पर होने वाली शिव विवाह की रस्में तीन दिन पूर्व ही प्रारंभ हो जाएंगी। राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर के शिवालयों में विवाह रस्मों सहित पूजन की तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं। राजधानी के महादेवघाट स्थित हाटकेश्वरनाथ के पं. सुरेश गिरी गोस्वामी के अनुसार, जिन पर्व में मध्यरात्रि पूजन का विधान होता है, उनमें उदया तिथि नहीं देखी जाती है। व्रत-पूजन सहित विवाह भी 15 फरवरी को ही होगा। ऐसे में इसके तीन दिन पूर्व मंदिर में हल्दी, संगीत, मेहंदी की रस्में परंपरानुसार प्रारंभ कर दी जाएगी।

श्रवण नक्षत्र और शिववास का संयोग
इस दिन उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के संयोग के साथ व्यतिपात योग भी रहेगा। महाशिवरात्रि के दिन शिववास रहता ही है, इसके साथ ही इस दिन शाम 7 बजकर 48 मिनट के बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होने वाला है। इस नक्षत्र में भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा षोडशॉपचार विधि से पूजा आराधना चार प्रहर में करनी चाहिए और संध्या के समय यानी प्रदोष काल में भगवान शिव का अभिषेक करें। महाशिवरात्रि के दिन ऐसा करते हैं तो सारे दुख, कष्ट, रोग, काल, दारीद्र आपके खत्म हो जाएगा और जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होगी।

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