जगदलपुर में मनाई गई स्वामी विवेकानंद की जयंती: युवाशक्ति को चेतना से जोड़ने का आह्वान बना कार्यक्रम का केंद्रीय भाव
जगदलपुर में नगर पालिका निगम द्वारा स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती विचारों के पुनर्जागरण के रूप में मनाई गई।
स्वामी विवेकानंद की जयंती पर मौजूद लोग
अनिल सामंत- जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में नगर पालिका निगम ने स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि विचारों के पुनर्जागरण के रूप में मनाया। यह अवसर न तो रस्म अदायगी था और न ही प्रतीकात्मकता यह उस चेतना का स्मरण था, जिसने भारत को आत्मगौरव का पाठ पढ़ाया और युवाओं को आत्मबल का मंत्र दिया।
धरमपुरा स्थित पीजी कॉलेज परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के समक्ष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहाँ श्रद्धा, संकल्प और सामाजिक उत्तरदायित्व का अद्भुत संगम देखने को मिला। पुष्पांजलि केवल फूलों की नहीं थी, बल्कि उन आदर्शों की थी, जिन्हें विवेकानंद ने जीवन का ध्येय बताया चरित्र, आत्मविश्वास और राष्ट्रबोध।
विवेकानंद एक संत होने के साथ चेतना के थे स्थापत्यकार
कार्यक्रम में यह स्पष्ट रूप से उभरा कि, विवेकानंद केवल एक संत नहीं, बल्कि चेतना के स्थापत्यकार थे। उन्होंने जिस भारत का स्वप्न देखा,वह केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि नैतिक और वैचारिक रूप से सशक्त राष्ट्र था। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि, यदि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाना है, तो केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण से शुरुआत करनी होगी।
प्रगति केवल संसाधनों से नहीं, संस्कारों से होती
सोमवार के भौतिकतावादी दौर में यह आयोजन युवाओं को यह स्मरण कराने का प्रयास था कि सफलता केवल सुविधा से नहीं, संयम से आती है और प्रगति केवल संसाधनों से नहीं, संस्कारों से होती है। यही स्वामी विवेकानंद की सबसे बड़ी विरासत है। नगर निगम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट था कि, विवेकानंद की जयंती मनाना पर्याप्त नहीं, उनके विचारों को जीना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इसी भाव के साथ पूरे आयोजन में गंभीरता, गरिमा और वैचारिक ऊँचाई बनी रही।
ऐसे किया जा सकता है स्वामी विवेकानंद के सपनों को साकार
कार्यक्रम में निगम अध्यक्ष खेम सिंह देवांगन ने कहा कि, आपसी सद्भाव और नैतिक सहयोग के माध्यम से ही स्वामी विवेकानंद के सपनों को साकार किया जा सकता है और भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित किया जा सकता है। वहीं निगम सभापति योगेंद्र पांडे ने कहा कि, स्वामी विवेकानंद के विचारों को विशेष रूप से युवाओं तक पहुँचाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। क्योंकि राष्ट्र का उत्थान और समग्र विकास ही स्वामी की सबसे बड़ी चिंता थी।
इस आयोजन का वैचारिक संदेश
यह कार्यक्रम केवल स्मृति का आयोजन नहीं था, बल्कि भविष्य का खाका था। प्रथम चरण में स्वामी विवेकानंद के विचारों को स्मरण किया गया,जो आत्मबल,अनुशासन और सेवा का पाठ पढ़ाते हैं। द्वितीय चरण में यह स्पष्ट किया गया कि युवाओं को केवल रोजगार नहीं, दृष्टि की आवश्यकता है। तृतीय चरण में वक्ताओं ने बताया कि राष्ट्रनिर्माण का रास्ता आत्मनिर्माण से होकर गुजरता है। चतुर्थ चरण में सामाजिक समरसता को विवेकानंद के दर्शन का मूल बताया गया। और अंतिम चरण में यह संदेश गूंजा कि यदि भारत को ऊँचा उठाना है, तो पहले विचारों को ऊँचा उठाना होगा।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम का संचालन एमआईसी सदस्य संग्राम सिंह राणा ने किया और आभार प्रदर्शन पार्षद पूनम सिन्हा ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से निर्मल पाणिग्रही,लक्ष्मण झा,सुरेश गुप्ता,संजय विश्वकर्मा, बाबुल नाग, त्रिवेणी रंधारी, श्वेता बघेल, आशा साहू, गायत्री बघेल, नेहा ध्रुव, बसंती समरथ, उमा मिश्रा, लोकेश चौधरी, गिरजा गुप्ता, माहेश्वरी ठाकुर, सुधा मिश्रा, ममता सिंह राणा, गीता नाग, आयुक्त नगर निगम प्रवीण वर्मा, रितेश सिन्हा सहित निगम के पार्षद और अधिकारीगण उपस्थित रहे।