बस्तर में कंपकंपाती ठंड: न्यूनतम पारा 8 डिग्री तक लुढ़का, शाम ढलते ही सूने पड़ने लगे बाजार, अलाव बना ग्रामीणों का सहारा
बसतर के संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बुधवार को न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री सेल्सियस रहा।
अलाव सेंकते लोग
अनिल सामंत- जगदलपुर। उत्तर दिशा से आ रही ठंडी एवं शुष्क हवाओं के असर से बस्तर अंचल में ठंड का प्रभाव लगातार गहराता जा रहा है। भले ही बस्तर में औपचारिक रूप से शीतलहर की घोषणा नहीं की गई हो, लेकिन न्यूनतम तापमान के 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सुबह-शाम की ठिठुरन ने लोगों को गर्म कपड़ों में लपेटने पर मजबूर कर दिया है,वहीं ठंड के कारण दिनचर्या भी बदली-सी नजर आ रही है।
संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बुधवार को न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया,जबकि अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री सेल्सियस रहा। ठंड का असर इतना तीखा है कि शाम होते ही शहर के बाजारों में रौनक फीकी पड़ने लगी है। सामान्य दिनों में देर रात तक गुलजार रहने वाले चौक-चौराहों पर अब सन्नाटा पसरने लगा है और लोग आवश्यक काम निपटाकर जल्दी घरों में दुबकना बेहतर समझ रहे हैं।
नदी किनारे के गांवों में और नीचे गिरा तापमान
ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। नदी तटवर्ती गांवों तथा घने जंगलों से लगे इलाकों में न्यूनतम तापमान कहीं-कहीं 6 से 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इन क्षेत्रों में ठंड का प्रकोप इतना अधिक है कि ग्रामीणों के लिए अलाव के बिना रात गुजारना मुश्किल हो गया है। खेत-खलिहानों में काम करने वाले किसान और मजदूर भी ठंड से बचाव के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने को मजबूर हैं।
अगले कुछ दिन ऐसे ही रहेंगे हालात
मौसम विभाग के अनुसार आगामी कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है, वहीं उत्तरी एवं मध्य छत्तीसगढ़ के एक-दो इलाकों में शीतलहर जैसी स्थिति बनने के आसार जताए गए हैं। प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज किया गया है,जबकि सर्वाधिक अधिकतम तापमान जगदलपुर में रिकॉर्ड हुआ। प्रदेश में मौसम संबंधी जानकारी मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के विज्ञानी एचपी चंद्रा द्वारा दी गई।
ठंड का बढ़ता असर जनजीवन पर डाल रहा सीधा प्रभाव
बस्तर अंचल में बढ़ती ठंड के चलते दिन की शुरुआत देर से हो रही है और शाम ढलते ही बाजारों में चहल-पहल कम हो जा रही है, ग्रामीण इलाकों में अलाव सामूहिक जीवन का केंद्र बन गया है, नदी तटों पर बसे गांवों में ठंड सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है, स्कूल जाने वाले बच्चे और कामकाजी वर्ग अतिरिक्त ऊनी कपड़ों का सहारा ले रहे हैं,वहीं आने वाले दिनों में ठंड के और तीखे होने की आशंका से लोग पहले से ही सतर्क नजर आ रहे हैं।