दुर्गम गांवों में घर-घर पहुँच रही स्वास्थ्य सेवा: आयुष विभाग की मोबाइल मेडिकल यूनिट बनी संजीवनी, 45 ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार

बस्तर जिले के दुर्गम इलाकों में आयुष विभाग की मोबाइल मेडिकल यूनिट ग्रामीणों के लिए संजीवनी साबित हो रही है।

Updated On 2026-01-07 15:33:00 IST

इलाज कराते हुए

अनिल सामंत- जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दुर्गम और दूरस्थ अंचलों में आज भी स्थायी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। वहाँ आयुष विभाग की मोबाइल मेडिकल यूनिट ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बनकर उभर रही है।

इस पहल का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक समुचित चिकित्सा सुविधा पहुँचाना है, ताकि कोई भी नागरिक उपचार से वंचित न रहे। बताया गया कि, यह योजना विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए छत्तीसगढ़ शासन की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके अंतर्गत ऐसे गांवों का चयन किया गया है जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ नगण्य या पूरी तरह अनुपलब्ध हैं।

ग्रामीणों स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक
जानकारी दी गई कि, मोबाइल मेडिकल यूनिट तीन स्तरों पर कार्य करती है। जिन रोगियों का उपचार घर पर संभव है, उन्हें मौके पर ही दवाइयाँ और परामर्श दिया जाता है। गंभीर रोगियों को तत्काल जिला चिकित्सालय रेफर कर भर्ती कराया जाता है, ताकि समय पर समुचित इलाज मिल सके। साथ ही, ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है और नजदीकी विद्यालयों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाता है।

कुल 45 रोगियों का किया गया उपचार
शिविरों के दौरान कुपोषण, एनीमिया, जोड़ों के दर्द, सर्दी-खांसी जैसे रोगों की पहचान कर उपचार किया जा रहा है। हाल ही में एक गांव में गंभीर कुपोषण से ग्रसित बच्ची को नजदीकी एनआरसी में रेफर किया गया, वहीं अन्य रोगियों को जिला आयुर्वेद चिकित्सालय भेजकर उपचार सुनिश्चित किया गया। टोकापाल क्षेत्र के बोथा बोदरा ग्राम में आयोजित शिविर में कुल 45 रोगियों की जांच कर उपचार दिया गया। जिससे ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भरोसा दोनों बढ़ा है। आयुष विभाग (जिला बस्तर) के जिला आयुष अधिकारी डॉ. मोहनीश साहू, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश भार्गव, फार्मासिस्ट हीरा लाल सोनबंकर और गुणनिधि सिद्धार ने शिविर में सेवाएँ प्रदान कीं।

मोबाइल मेडिकल यूनिट कार्यप्रणाली
स्वास्थ्य सुविधा से वंचित गांवों का चयन कर मौके पर चिकित्सा शिविर आयोजन, घर पर उपचार योग्य रोगियों का तत्काल इलाज, गंभीर रोगियों को जिला चिकित्सालय या एनआरसी में रेफर कर भर्ती, ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, विद्यालयों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण और एनीमिया, कुपोषण, जोड़ों के दर्द व मौसमी रोगों पर विशेष फोकस इस योजना की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

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