भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला: ACB ने 3 पटवारियों के खिलाफ पहला पूरक चालान किया पेश

भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले के मामले में ACB ने 3 पटवारियों के खिलाफ पहला पूरक चालान पेश किया है। इन पर 40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।

Updated On 2026-01-24 15:58:00 IST

भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला

रायपुर। भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाले के मामले में ACB ने गिरफ्तार 3 पटवारियों के खिलाफ पहला पूरक चालान पेश किया है। आरोप है कि, इनके इस कृत्य से शासन को लगभग 40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इन पर ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 30/2025 में धारा 7 सी, 12 भ्र.नि.अ. 1988 (संशोधित 2018) एवं धारा 409, 467, 471, 420, 120-बी भादवि के तहत प्रकरण दर्ज है। एजेंसी ने दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन एवं बसंती घृतलहरे को 29 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि दिनेश पटेल (तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा), लेखराम देवांगन (तत्कालीन पटवारी, ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24) एवं बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी, ग्राम भेलवाडीह) द्वारा लोकसेवक पद पर रहते हुए पद का दुरुपयोग किया। इन्होने भूमाफियों/प्राइवेट व्यक्तियों से षड्यंत्र कर भारतमाला परियोजना में प्रभावित होने वाली भूमि के भूमि स्वामियों का बैकडेट में खाता विभाजन (बटवारा) एवं नामांतरण का कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

आरोपी दिनेश पटेल की भूमिका
जांच से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि अभियुक्त दिनेश पटेल, तत्कालीन पटवारी (हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा) ने खाता दुरुस्ती/प्रपत्र-10/आपत्ति निराकरण आदि के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया। अवार्ड के समय अधिग्रहीत भूमि को कृत्रिम उपखण्डों में विभाजित दर्शाकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई गई। फलस्वरूप शासन को 30,82,14,868/- की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया परिलक्षित है।

आरोपी लेखराम देवांगन की भूमिका
विवेचना से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि अभियुक्त लेखराम देवांगन, तत्कालीन पटवारी (ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24) ने खाता दुरुस्ती/प्रपत्र-10/भुगतान प्रतिवेदन आदि के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया। अवार्ड के समय मूल खसरों को कृत्रिम उपखण्डों में दर्शाकर वास्तविक देय राशि की तुलना में अत्यधिक मुआवजा भुगतान कराया गया। फलस्वरूप शासन को ₹7,16,26,925/- की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया परिलक्षित है।

आरोपी बसंती घृतलहरे की भूमिका
विवेचना से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि अभियुक्त बसंती घृतलहरे, तत्कालीन पटवारी (ग्राम भेलवाडीह) ने "मूल खसरों को अवार्ड चरण में कृत्रिम उपखण्डों में विभाजित दर्शाकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई। फलस्वरूप शासन को ₹1,67,47,464/- की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया परिलक्षित है। 

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