हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सेवा काल में सरकारी अधिकारी से नहीं होगी वेतन वसूली, पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ रिकवरी आदेश रद्द
बिलासपुर हाईकोर्ट ने अधिक वेतन भुगतान और उसके बाद उसकी रिकवरी के आदेश को रद्द कर दिया है।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय
पंकज गुप्ते- बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि, सेवा काल के दौरान यदि किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को गलत तरीके से अधिक वेतन का भुगतान हो गया हो, तो उससे वसूली नहीं की जा सकती। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिंगल बेंच ने पुलिस निरीक्षक दूरसंचार के पद पर पदस्थ देवकुमार दादर के खिलाफ जारी रिकवरी आदेश को निरस्त कर दिया है और वसूली गई राशि तत्काल लौटाने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल मामला बालाघाट, राजनांदगांव निवासी पूर्व पुलिस लाइन दूरसंचार केंद्र में पदस्थ रहे देवकुमार दादर से जुड़ा है। भिलाई जोन द्वारा उनके पूर्व सेवा काल के दौरान वेतन वृद्धि की गणना में त्रुटि बताते हुए अधिक भुगतान का हवाला देकर वसूली आदेश जारी किया गया था।
रिकवरी आदेश को दी चुनौती
इस आदेश को चुनौती देते हुए देवकुमार दादर ने अपने अधिवक्ताओं अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला दिया गया, जिनमें यह सिद्धांत स्थापित किया गया है कि, किसी सरकारी कर्मचारी से सेवा काल में अधिक वेतन भुगतान के नाम पर वसूली नहीं की जा सकती, खासकर तब जब भुगतान पांच वर्ष से अधिक समय पूर्व किया गया हो और उसमें कर्मचारी की कोई गलती न हो।
रिकवरी आदेश रद्द, वसूली गई रकम तत्काल वापस देने के आदेश
हाईकोर्ट ने इन न्यायिक दृष्टांतों को स्वीकार करते हुए कहा कि इस तरह की वसूली कानूनन गलत है। कोर्ट ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए पुलिस इंस्पेक्टर दूरसंचार के खिलाफ जारी रिकवरी आदेश को रद्द कर दिया और एसपी दूरसंचार, भिलाई जोन को निर्देशित किया कि, याचिकाकर्ता से वसूली गई राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। यह फैसला राज्य के अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा।