बस्तर की तीन हस्तियां पद्मश्री से अलंकृत: बुधरी ताती और डॉ. गोडबोले दंपत्ति को मिलेगा पद्म पुरस्कार, CM साय ने दी बधाई

केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा की, जिसमें छत्तीसगढ़ की तीन विशिष्ट हस्तियों बुधरी ताती, डॉ. आर.टी. गोडबोले और सुनीता गोडबोले को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।

By :  Ck Shukla
Updated On 2026-01-26 10:12:00 IST

बुधरी ताती, डॉ. आर टी गोडबोले, सुनीता गोडबोले को मिलेगा पद्मश्री सम्मान

रायपुर। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि बस्तर अंचल में सेवाभाव से कार्य कर रही तीन विशिष्ट हस्तियों-समाजसेविका बुधरी ताती, डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जारी सूची में छत्तीसगढ़ की इन विभूतियों को स्थान मिलने से पूरे राज्य में हर्ष का माहौल है।

छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'X' के माध्यम से सभी चयनित हस्तियों को बधाई देते हुए कहा कि, यह सम्मान छत्तीसगढ़ की सेवा भावना और मानवीय संवेदनाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। बस्तर के दूरस्थ व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेवा कार्य करने वाली इन विभूतियों ने राज्य और समाज दोनों को गौरवान्वित किया है।

बस्तर की बुधरी ताती को पद्मश्री सम्मान
दंतेवाड़ा जिले के हीरानार निवासी बुधरी ताती चार दशकों से अधिक समय से महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान और समाजसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। वर्ष 1984 से उन्होंने नशामुक्ति अभियान, साक्षरता, सामाजिक जागरूकता और बेटियों की शिक्षा को जीवन का मिशन बनाया।

आदिवासी समुदाय की ‘बड़ी दीदी’
वे अब तक 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। आदिवासी समुदाय में उनकी लोकप्रियता इतनी है कि लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘बड़ी दीदी’ कहकर संबोधित करते हैं। उनके समर्पण के लिए राज्य सरकार द्वारा भी उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

निःशुल्क चिकित्सा सेवा देने वाला गोडबोले दंपत्ति
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले पिछले 37 वर्षों से बस्तर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा दे रहे हैं।

दुर्गम गांवों तक स्वास्थ्य की रोशनी
वे ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ के माध्यम से उन गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते हैं जहां आज भी सड़क, बिजली और नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। दोनों स्वयं पैदल यात्रा कर या सीमित साधनों के सहारे गांवों तक पहुंचते हैं, स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं और जरूरतमंदों का उपचार करते हैं। उनका प्रयास कुपोषण उन्मूलन, प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य जागरूकता को जमीनी स्तर पर मजबूत कर रहा है।

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