एक पत्थर, 33 फीट ऊंचाई और 1008 लिंगम: बिहार में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग, जानिए महत्व
बिहार में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग। जानें कहां स्थित है, कितना विशाल है, कैसे बना और विराट रामायण मंदिर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्य।
बिहार में के पूर्वी चंपारण जिले में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग।
World Biggest Shivling: बिहार ने धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। राज्य में दुनिया के सबसे बड़े अखंड शिवलिंग (World Biggest Monolithic Shivling) की स्थापना की गई है, जिसे लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। यह विशाल शिवलिंग न सिर्फ अपनी ऊंचाई और वजन के कारण खास है, बल्कि इसकी आध्यात्मिक और स्थापत्य विशेषताएं भी इसे अद्वितीय बनाती हैं। इस खबर में हम आपको इससे जुड़े सभी अहम सवालों के जवाब विस्तार से बता रहे हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग कहां स्थित है?
दुनिया का यह विशाल अखंड शिवलिंग बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित है। इसे कैथवलिया, जानकी नगर में बन रहे भव्य विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है। इस स्थान को धार्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है और शिवलिंग की स्थापना के बाद इसकी पहचान और भी मजबूत हो गई है।
अखंड शिवलिंग कितना बड़ा है और किस पत्थर से बना है?
विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा है। इसे ब्लैक ग्रेनाइट के एक ही विशाल पत्थर (Monolithic Stone) से तराशा गया है, यानी इसमें कहीं भी जोड़ नहीं है। यही वजह है कि इसे अखंड शिवलिंग कहा जा रहा है। इसकी भव्यता इसे विश्व स्तर पर विशिष्ट बनाती है।
इस शिवलिंग को क्यों माना जा रहा है सबसे खास?
इस अखंड शिवलिंग पर 1008 सहस्त्रलिंगम उकेरे गए हैं, जो इसे आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। एक ही पत्थर से बने इस शिवलिंग का वजन करीब 210 मीट्रिक टन है। इतनी विशाल संरचना को एक ही शिला से तैयार करना अपने आप में शिल्पकला का चमत्कार माना जा रहा है।
किसने करवाया दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग का निर्माण?
इस अखंड शिवलिंग का निर्माण बिहार धार्मिक न्यास पर्षद की पहल पर कराया गया है। धार्मिक न्यास पर्षद ने इसे बिहार की सांस्कृतिक पहचान और आस्था के प्रतीक के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी।
शिवलिंग को किसने तराशा और कैसे तैयार हुआ?
शिवलिंग निर्माण की पूरी प्रक्रिया प्रसिद्ध शिल्पकार हेमलता देवी की निगरानी में पूरी हुई। उनके नेतृत्व में शिल्पकारों की एक बड़ी टीम ने इस विशाल पत्थर को आकार दिया। इस कार्य में उनके पुत्र विनायक बैकट रमण की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्षों की मेहनत और तकनीकी कौशल से यह अद्भुत शिवलिंग तैयार हो सका।
शिवलिंग का निर्माण कहां हुआ और बिहार तक कैसे पहुंचा?
इस अखंड शिवलिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाड़ू गांव में तैयार किया गया। इसके बाद इसे विशेष व्यवस्था के तहत बिहार लाया गया। शिवलिंग ने आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से होते हुए करीब 2565 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया। इस यात्रा में लगभग 46 दिन लगे।
शिवलिंग बनाने में कितना समय और खर्च आया?
इस शिवलिंग को तैयार करने में करीब 10 साल का समय लगा। वहीं, इसके निर्माण पर लगभग 3 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इतने लंबे समय तक चले इस प्रोजेक्ट को धैर्य और समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है।
विराट रामायण मंदिर की क्या है खासियत?
जिस विराट रामायण मंदिर में यह सहस्त्रलिंगम स्थापित किया गया है, वह अपने आप में एक भव्य परियोजना है। यह मंदिर करीब 120 एकड़ में फैला हुआ है। मंदिर की लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर बनाए जाएंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट रखी गई है, जो इसे देश के सबसे ऊंचे मंदिर शिखरों में शामिल करती है।
विराट रामायण मंदिर का निर्माण और शिलान्यास
विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य 20 जून 2023 से जारी है और अभी यह पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है। इस भव्य मंदिर का शिलान्यास बिहार धार्मिक न्यास पर्षद के तत्कालीन अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल ने किया था। मंदिर के पूर्ण होने के बाद यह बिहार ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल होगा।