नीट छात्रा मौत मामला: एक्शन मोड में गृह मंत्री सम्राट चौधरी; मुख्य सचिव और DGP तलब, दिए सख्त निर्देश

पटना में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत पर डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने हाई-लेवल मीटिंग की। जांच में देरी और परिजनों के असंतोष को देखते हुए SIT और पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई है।

Updated On 2026-01-30 18:59:00 IST

पटना में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत पर डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने हाई-लेवल मीटिंग की। (फाइल फोटो)

Patna NEET Student Case: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की मौत का मामला अब सीधे सरकार की निगरानी में आ गया है। शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने सरकारी आवास पर एक आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसमें राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे के सबसे बड़े अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार को विशेष रूप से तलब किया गया था। उपमुख्यमंत्री ने मामले की अब तक की प्रगति पर असंतोष जाहिर करते हुए एसआईटी (SIT) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने साफ कर दिया कि यह मामला केवल एक मौत का नहीं, बल्कि प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा और सिस्टम के भरोसे से जुड़ा है।

परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

जब प्रशासन बैठकें कर रहा था, उसी दौरान मृतका की मां और अन्य परिजन अपनी फरियाद लेकर डीजीपी के पास पहुंचे। डीजीपी आवास से बाहर निकलते समय छात्रा की मां के चेहरे पर सिस्टम के खिलाफ गहरी निराशा और गुस्सा साफ नजर आया। उन्होंने मीडिया को बताया कि पुलिस की अब तक की कार्यप्रणाली पक्षपाती रही है। मां का आरोप है कि जांच अधिकारी तथ्यों को उजागर करने के बजाय मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हैं। परिजनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें मौजूदा जांच प्रक्रिया पर बिल्कुल भरोसा नहीं है और उन्हें लग रहा है कि उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा।

एसआईटी को मिला अल्टीमेटम

उपमुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान जांच टीम को दो टूक चेतावनी दी कि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि छात्रा के फोन रिकॉर्ड्स, हॉस्टल के सीसीटीवी और उसके संपर्क में रहे लोगों की भूमिका की गहन जांच की जाए। सरकार ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि क्या छात्रा पर किसी तरह का बाहरी दबाव था या वह किसी प्रताड़ना का शिकार हुई थी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि घटना के तुरंत बाद हॉस्टल प्रशासन की भूमिका क्या थी और क्या उन्होंने किसी तथ्य को छुपाने की कोशिश की।

प्रशासन का दावा: रसूखदारों को बचाने का सवाल ही नहीं

परिजनों के आरोपों के बीच पुलिस और सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन का कहना है कि यह जांच पूरी तरह से वैज्ञानिक आधार पर की जा रही है और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीजीपी विनय कुमार ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परिजनों की हर आशंका का समाधान किया जाए और उन्हें जांच प्रक्रिया से अवगत कराया जाए। इस हाई-लेवल बैठक के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े खुलासे हो सकते हैं और दोषियों पर कानून का शिकंजा कसना तय है।

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