Bihar Bhavan: मुंबई में बिहार भवन को लेकर सियासी घमासान, मनसे नेता ने नीतीश सरकार को दी धमकी, कहा- नहीं बनने देंगे
Mumbai Bihar Bhavan controversy: 314 करोड़ की लागत से मुंबई में बनने वाले बिहार भवन का राज ठाकरे की पार्टी MNS ने विरोध किया। पार्टी के नेता ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धमकी देते हुए कहा कि मुंबई में बिहार भवन नहीं बनने देंगे।
मुंबई में 314 करोड़ की लागत से प्रस्तावित बिहार भवन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने कड़ा विरोध जताया है।
Mumbai Bihar Bhavan controversy: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित बिहार भवन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एक नेता ने इस परियोजना का खुला विरोध करते हुए नीतीश सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक मनसे मौजूद है, मुंबई में बिहार भवन नहीं बनने दिया जाएगा। इस बयान के बाद महाराष्ट्र और बिहार की राजनीति में नई तल्खी देखने को मिल रही है।
मुंबई में बिहार भवन के फैसले पर क्यों मचा बवाल?
दरअसल, बिहार सरकार ने हाल ही में दिल्ली की तर्ज पर मुंबई में भी बिहार भवन के निर्माण का निर्णय लिया है। इस प्रस्ताव को नीतीश कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। योजना के तहत मुंबई के एलफिंस्टन एस्टेट इलाके में करीब 314 करोड़ रुपये की लागत से बिहार भवन बनाया जाएगा, जहां इलाज के लिए मुंबई आने वाले बिहार के मरीजों, खासकर कैंसर पीड़ितों को ठहरने की सुविधा दी जाएगी।
मनसे नेता का तीखा बयान
मनसे के नगरसेवक यशवंत किलेदार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महाराष्ट्र पहले से ही कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में किसान संकट, महंगाई, बेरोजगारी और महंगी शिक्षा जैसे मुद्दों को नजरअंदाज कर मुंबई में बिहार भवन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। किलेदार ने साफ शब्दों में कहा कि मनसे इस निर्माण का विरोध करेगी।
नीतीश सरकार पर उठाए सवाल
मनसे नेता ने नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर बिहार सरकार को कैंसर मरीजों की इतनी चिंता है, तो ऐसी उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं बिहार में ही क्यों नहीं विकसित की जातीं। उन्होंने सवाल उठाया कि मुंबई पर अतिरिक्त बोझ डालकर दूसरे राज्यों की योजनाएं लागू करना कितना उचित है।
मराठी बनाम बाहरी राजनीति फिर चर्चा में
गौरतलब है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना लंबे समय से मराठी अस्मिता और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर राजनीति करती रही है। मुंबई और अन्य शहरों में उत्तर भारतीयों को लेकर मनसे कार्यकर्ताओं के विरोध और टकराव के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। बिहार भवन को लेकर दिया गया यह बयान एक बार फिर मराठी बनाम बाहरी बहस को हवा देता नजर आ रहा है।
आगे क्या बढ़ेगा विवाद?
बिहार भवन के निर्माण को लेकर मनसे के इस विरोध के बाद अब देखना होगा कि नीतीश सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है। साथ ही यह भी तय होगा कि यह मुद्दा केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में और बड़ा विवाद खड़ा करता है।