Mini Gun Factory: भोजपुर में पुलिस की कार्रवाई बेअसर? तीन महीने में दूसरी बार पकड़ी गई मिनी गन फैक्ट्री
भोजपुर जिले में अवैध हथियार निर्माण का नेटवर्क लगातार फैल रहा है। तीन महीने में दूसरी मिनी गन फैक्ट्री के खुलासे ने पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भोजपुर जिले के तियर थाना इलाके में अवैध हथियार बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है।
Ara Crime News: भोजपुर जिले में अवैध हथियार निर्माण का नेटवर्क लगातार पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देता नजर आ रहा है। बीते तीन महीनों के भीतर दूसरी बार मिनी गन फैक्ट्री के खुलासे ने जिले की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इमादपुर थाना क्षेत्र के बाद अब तियर थाना इलाके में अवैध हथियार बनाने का गोरखधंधा सामने आया है।
ताजा मामला तियर थाना क्षेत्र के उतरदाहां गांव का है, जहां पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में फैक्ट्री संचालक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि यहां लंबे समय से देसी हथियारों का निर्माण किया जा रहा था।
क्यों बढ़ रही अवैध बिक्री?
पुलिस जांच में सामने आया है कि देसी कट्टा और पिस्टल की अवैध बिक्री इस नेटवर्क का मुख्य आधार है। जानकारों के मुताबिक देसी कट्टा पांच से छह हजार रुपये और देसी पिस्टल 20 से 25 हजार रुपये तक में आसानी से बिक जाती है। कम लागत और अधिक मुनाफे के कारण यह कारोबार अपराधियों के लिए आकर्षक बना हुआ है, जिससे यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।
पहला मामला: इमादपुर में हुआ था खुलासा
इससे पहले 15 अक्टूबर 2025 को इमादपुर थाना क्षेत्र में एक झोपड़ीनुमा घर में संचालित मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया गया था। उस कार्रवाई में पुलिस ने संचालक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। मौके से अर्धनिर्मित पिस्तौल, हथियारों के पुर्जे, लेथ मशीन और अन्य औजार बरामद किए गए थे। पूछताछ में यह भी सामने आया था कि कई अपराधी वहीं से हथियार खरीदते थे।
दूसरा मामला: तियर में मां-बेटे तक पहुंचे तार
19 जनवरी 2026 की रात तियर थाना क्षेत्र में हुई छापेमारी में पुलिस ने धनजी शर्मा और उसकी मां प्रभावती देवी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से दो देसी कट्टा, छह अर्धनिर्मित कट्टा, कारतूस, खोखा, ड्रिल मशीन और हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण जब्त किए हैं। दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
नेटवर्क की गहराई पर उठे सवाल
लगातार दूसरे खुलासे से यह साफ हो गया है कि अवैध हथियार निर्माण किसी एक व्यक्ति या गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार जिले में गहराई तक फैले हुए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केवल छापेमारी काफी है या फिर इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए बड़ी और ठोस रणनीति की जरूरत है।
पुलिस की कार्रवाई जारी
एसपी राज के निर्देश पर जिले में अवैध हथियार निर्माण और तस्करी के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
भोजपुर में बार-बार सामने आ रही मिनी गन फैक्ट्रियों ने साफ कर दिया है कि अवैध हथियार कारोबार जिले की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।