बिहार चुनाव रद्द करने की मांग: महिलाओं को ₹10 हजार बांटने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची जन सुराज, कल होगी सुनवाई
बिहार चुनाव 2025 को रद्द करने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची जन सुराज पार्टी। वोटिंग से पहले महिलाओं को ₹10 हजार ट्रांसफर का आरोप, जानिए CJI का रुख और पूरा मामला।
बिहार चुनाव 2025 को रद्द करने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची जन सुराज पार्टी।
Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। चुनाव में खाता तक न खोल पाने वाली प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी ने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार सरकार ने चुनाव से ठीक पहले एक सरकारी योजना के जरिए मतदाताओं को प्रभावित किया। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग की है, जिस पर अब शीर्ष अदालत में सुनवाई होगी।
जन सुराज की याचिका
जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए किया। पार्टी का आरोप है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद लाखों महिलाओं के खातों में सीधे ₹10-10 हजार रुपये भेजे गए, जिससे निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
कितनी महिलाओं को मिला पैसा?
याचिका के मुताबिक, पहले यह योजना JEEVIKA से जुड़ी महिलाओं तक सीमित थी, जिनकी संख्या करीब 1 करोड़ बताई गई थी। लेकिन चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद कुल 1.56 करोड़ महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया गया। जन सुराज का दावा है कि इसका मतलब यह है कि MCC लागू होने के बाद भी नए लाभार्थियों को जोड़ा गया, जो चुनावी नियमों का सीधा उल्लंघन है।
क्या है मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना?
इस योजना के तहत बिहार सरकार ने हर परिवार की एक महिला को स्वरोजगार शुरू करने के लिए ₹10,000 की सीधी आर्थिक मदद देने का फैसला किया था। इसके साथ ही मूल्यांकन के बाद आगे ₹2 लाख तक की सहायता का भी वादा किया गया था। जन सुराज का आरोप है कि इस योजना को चुनाव से ठीक पहले लागू करना ही संदेह पैदा करता है।
पोलिंग बूथ ड्यूटी को लेकर भी सवाल
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिन महिलाओं को योजना का लाभ मिला, उन्हें ही मतदान के दिन पोलिंग बूथों पर तैनात किया गया। पार्टी का कहना है कि यह व्यवस्था न तो निष्पक्ष थी और न ही तटस्थ, जिससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
वित्तीय प्रक्रिया पर उठे सवाल
जन सुराज ने यह भी दावा किया है कि इस योजना को केवल कैबिनेट की मंजूरी से लागू किया गया, जबकि विधानसभा की स्वीकृति नहीं ली गई। पार्टी का आरोप है कि योजना के लिए धन राज्य के आकस्मिक कोष (Contingency Fund) से निकाला गया, जो संविधान के अनुच्छेद 267 का उल्लंघन हो सकता है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
याचिका में चुनाव आयोग (ECI) पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जन सुराज का कहना है कि चुनाव आयोग ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, जबकि उसके अपने नियमों के मुताबिक चुनाव घोषित होने के बाद नकद लाभ या नई योजनाओं का विस्तार प्रतिबंधित है।
किन नियमों के उल्लंघन का दावा?
पार्टी ने दलील दी है कि यह पूरा मामला Representation of the People Act, 1951 और संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 324 का उल्लंघन है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं।
सुप्रीम कोर्ट में कब होगी सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने इस याचिका को अपनी पीठ के समक्ष शुक्रवार, 6 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं।