पुतिन का भारत दौरा: 19 बड़े समझौते, बिना रुकावट के फ्यूल मिलेगा; SMR न्यूक्लियर सहयोग पर बड़ा ऐलान
यूक्रेन युद्ध के बाद पहली भारत यात्रा में पुतिन और मोदी ने 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। सस्ता तेल, गैस, SMR न्यूक्लियर सहयोग और भारतीयों की रिहाई पर बड़ा फोकस।
PM मोदी और रूसी प्रेसिडेंट पुतिन की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस।
मोदी-पुतिन शिखर वार्ता: यूक्रेन पर मोदी का स्पष्ट संदेश, कहा- "भारत न्यूट्रल नहीं"
पुतिन के साथ बातचीत में पीएम मोदी का बड़ा बयान, बोले- भारत शांति के साथ, विश्व जल्द संकटों से उभरेगा
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपना दो दिवसीय भारत दौरा सफलतापूर्वक पूरा कर मॉस्को लौट गए हैं । यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी भारत की पहली यात्रा थी और इसे कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है।
इस दौरे के दौरान भारत और रूस ने कुल 19 समझौते और MoU पर हस्ताक्षर किए। सबसे खास बात यह रही कि पश्चिमी देशों के भारी दबाव और अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीद पर भारत को 25% अतिरिक्त टैरिफ की धमकी के बावजूद दोनों देशों ने ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प जताया।
रूस ने साफ ऐलान किया कि वह भारत को कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोकेमिकल रिफाइनिंग और न्यूक्लियर क्षेत्र में निर्बाध सप्लाई जारी रखेगा। यानी आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग पहले से कहीं अधिक गहरा हो सकता है और भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा।
दूसरा सबसे बड़ा और रणनीतिक ऐलान सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में हुआ। भारत अभी कोयले पर बहुत निर्भर है, लेकिन अब छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर (SMR) लगाने की योजना बना रहा है। इस तकनीक में रूस दुनिया का नंबर-1 देश माना जाता है। अब रूस भारत को और बड़े पैमाने पर सहयोग देगा, जिससे भारत का 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर बिजली उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना काफी आसान हो जाएगा (वर्तमान में हम केवल 8 GW ही बना पा रहे हैं)।
पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी ने महज 24 घंटे में तीन बार मुलाकात की, इसमें निजी डिनर, द्विपक्षीय वार्ता और भारत-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित किया। दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की।
हालांकि इस बार किसी बड़ी रक्षा डील (जैसे लड़ाकू जेट या बड़ा हथियार सौदा) का ऐलान नहीं हुआ, जबकि पहले कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी चर्चा थी।
19 समझौतों में मुख्य रूप से ये क्षेत्र शामिल हैं:
- शिप बिल्डिंग में सहयोग
- भारतीय नाविकों को आर्कटिक (बर्फीले) समुद्री रास्तों में जहाज चलाने की ट्रेनिंग
- नई उत्तरी शिपिंग लेन (Northern Sea Route) में निवेश
- सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा
- क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और आपूर्ति
कुल मिलाकर यह दौरा ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भारत के लिए बहुत बड़ी कामयाबी रहा। दोनों देशों ने साफ संदेश दे दिया कि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत-रूस की दोस्ती पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और गहरी होने जा रही है।
PM मोदी-रूसी प्रेसिडेंट पुतिन की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और रूस की साझेदारी को ‘ध्रुव तारे’ की तरह अटल और स्थिर बताया। उन्होंने कहा कि पिछले आठ दशकों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव, वैश्विक संकट और मानवता पर आए असंख्य खतरे देखे हैं, लेकिन इन सबके बीच भारत-रूस की मित्रता हर परिस्थिति में मजबूती के साथ कायम रही है।
पीएम मोदी के अनुसार दोनों देशों के संबंध समय की हर कसौटी पर खरे उतरे हैं और यही भरोसा भविष्य की साझेदारी को और मजबूत बनाता है। भारत और रूस ने 2030 तक आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एक व्यापक रणनीति भी तैयार की है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत के साथ रिश्तों को विशेष महत्व देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए गहरा आभार है। उन्होंने पीएम मोदी द्वारा दिए गए निजी डिनर का भी धन्यवाद किया।
पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बिना किसी रुकावट के तेल की आपूर्ति जारी रखेगा। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देश भुगतान निपटान में राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को तेजी से बढ़ा रहे हैं और अब द्विपक्षीय व्यापार में 96% लेन-देन रूबल और रुपए में होने लगे हैं।
भारत दौरे के दूसरे दिन पुतिन को राष्ट्रपति भवन में 21 तोपों की सलामी के साथ औपचारिक स्वागत दिया गया। गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त करने के बाद वे सीधे राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह पूरा कार्यक्रम भारत-रूस की पुरानी और भरोसेमंद साझेदारी को एक बार फिर मजबूत संदेश देता है।
मोदी ने पुतिन के सामने उठाया भारतीयों की रिहाई का मुद्दा
पीएम नरेंद्र मोदी ने पुतिन के साथ बैठक में रूसी सेना में फंसे भारतीयों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। भारत ने रूस से आग्रह किया है कि सभी भारतीय नागरिकों को जल्द और सुरक्षित रिहा किया जाए।
फंसे भारतीयों के परिवार लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से अपने परिजनों को वापस लाने की मांग कर रहे हैं।
देश सचिव विक्रम मिस्री का बयान
मोदी ने रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती भारतीयों का मुद्दा उठाया है। भारत लगातार कोशिश कर रहा है कि सभी भारतीय जल्द वापिस लाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी ऑफर पर रूस की सेना में शामिल होने की गलती न करें, कई लोग वहां फंस चुके हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, कम से कम 44 भारतीय इस समय रूसी सेना में हैं। कई युवाओं को काम का लालच देकर रूस बुलाया गया और वहां धोखे से सेना में भर्ती करा दिया गया।कुछ लोग स्टूडेंट/टूरिस्ट वीज़ा पर गए थे, जिनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उनसे मजबूरी में सैन्य कॉन्ट्रैक्ट साइन कराए गए।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा: दूसरे दिन की खास तस्वीरें
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे पर राष्ट्रपति भवन में उनके सम्मान में भव्य डिनर का आयोजन किया गया। इस डिनर में पुतिन सहित उनका पूरा प्रतिनिधिमंडल उपस्थित रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्तियों ने भी इस डिनर में शिरकत की और इसका आनंद उठाया।
राष्ट्रपति भवन पहुंचे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का उनके सम्मान में आयोजित भोज में शामिल होने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हार्दिक स्वागत किया।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ITC मौर्य होटल से राष्ट्रपति भवन के लिए निकले। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज उनके सम्मान में डिनर का आयोजन रखा है।
भारत-रूस व्यापार मंच को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- “...आज भारत किफायती, उच्च-गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रिक वाहनों, टू-व्हीलर्स तथा CNG आधारित मोबिलिटी समाधानों में विश्व का अग्रणी देश बन चुका है। वहीं रूस उन्नत सामग्रियों (एडवांस्ड मटीरियल्स) का एक प्रमुख उत्पादक है।
हम दोनों मिलकर इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और भविष्य की मोबिलिटी तकनीकों में मजबूत साझेदारी कर सकते हैं। इससे हम न केवल अपनी-अपनी जरूरतें पूरी करेंगे, बल्कि ग्लोबल साउथ- खास तौर पर अफ्रीका के सतत विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे...”
भारत-रूस व्यापार मंच को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- “राष्ट्रपति पुतिन और मैंने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन कल से राष्ट्रपति पुतिन के साथ हुई मेरी गहन चर्चाओं और सामने आ रही नई संभावनाओं को देखते हुए मुझे पूरा विश्वास है कि हमें 2030 तक इंतज़ार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हम इस लक्ष्य को निर्धारित समय से काफी पहले हासिल कर लेंगे। मेरा यह आत्मविश्वास दिन-प्रतिदिन और मजबूत होता जा रहा है। टैरिफ तथा गैर-टैरिफ अवरोधों को तेज़ी से कम किया जा रहा है।”
भारत-रूस व्यापार मंच को संबोधित करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा- “रूस फरवरी 2026 में भारत में आयोजित होने वाले ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट (AI Summit) में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए बहुत उत्साहित और इच्छुक है।”
भारत-रूस व्यापार मंच को संबोधित करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा- “मैं विशेष रूप से इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत एक पूरी तरह स्वतंत्र और संप्रभु विदेश नीति का अनुसरण कर रहा है और साथ ही यह नीति बहुत शानदार परिणाम भी दे रही है।
आज भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी आर्थिक नीतियों और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे ऐतिहासिक महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों के कारण भारत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर और संप्रभु बनता जा रहा है। भारत का सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र और फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर आज विश्व में अग्रणी स्थान रखते हैं।”
भारत-रूस व्यापार मंच को संबोधित करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा- “हमारा रूसी प्रतिनिधिमंडल केवल ऊर्जा क्षेत्र की चर्चा करने या तेल-गैस आपूर्ति के अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए ही भारत नहीं आया है। हम भारत के साथ हर क्षेत्र में गहरे और बहुआयामी संबंध चाहते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी निजी बातचीत में कई बार इस बात पर जोर दिया है कि भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अपार और तेजी से बढ़ते अवसर मौजूद हैं, लेकिन अब तक इनका दोनों देशों की इच्छा के मुताबिक पूरा दोहन नहीं हो पाया है। इसीलिए हमने यह व्यापार मंच आयोजित किया है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-फ्रांस बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए कहा कि हमने रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र को पहले ही निजी क्षेत्र के लिए पूरी तरह खोल दिया है, जिससे इन क्षेत्रों में अभूतपूर्व अवसर पैदा हो रहे हैं।
अब हम सिविल न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को भी निजी निवेश और भागीदारी के लिए खोलने जा रहे हैं। यह कदम महज प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि सोच में आमूलचूल परिवर्तन है। इन सभी सुधारों के पीछे एक ही लक्ष्य है- विकसित भारत का निर्माण।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत आज रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के सिद्धांत पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत-रूस संबंधों को दो देशों के साझा सपनों और आकांक्षाओं को गति देने वाली एक मजबूत शक्ति बताया। पीएम मोदी के अनुसार, यही साझेदारी दोनों देशों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का लॉन्चपैड बन रही है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन ताज़ा चर्चाओं से यह स्पष्ट है कि दोनों देश यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि भारत-रूस की साझा ऊर्जा, नवाचार और महत्वाकांक्षाएं भविष्य को नई दिशा दे रही हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत में जो बड़े और ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं, उन्हें पूरी दुनिया देख रही है। उन्होंने कहा कि रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र पर चलते हुए भारत अब विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेज गति से अग्रसर है। “हम न थके हैं, न रुके हैं। हमारे संकल्प पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं और हम अभूतपूर्व गति से अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं,” उन्होंने कहा।
पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जीएसटी जैसे सुधारों ने देश में व्यापार करने में सुगमता को नई ऊंचाई दी है। इसके साथ ही भारत-रूस के बीच पर्यटन व निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और दोनों देशों की जनता एक-दूसरे के और करीब आएगी।