बजट सत्र 2026 का आगाज: 27 साल बाद फिर दोहराया जाएगा इतिहास - 1999 के बाद पहली बार रविवार को पेश होगा देश का बजट, राष्ट्रपति के अभिभाषण से सत्र का आगाज
बजट सत्र 2026 आज से राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू हो रहा है। भारत के इतिहास में पहली बार 1 फरवरी (रविवार) को आम बजट पेश होगा।
यह बजट सत्र न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
नई दिल्ली : आज, 28 जनवरी 2026 से संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है। यह सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार 'आम बजट' रविवार के दिन पेश किया जाएगा।
सत्र की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के संयुक्त अभिभाषण से होगी। राष्ट्रपति अपने संबोधन में सरकार की भविष्य की रूपरेखा और पिछले वर्ष की उपलब्धियों का ब्यौरा पेश करेंगी।
यह बजट सत्र न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि विपक्ष कई ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
पहली बार रविवार को पेश होगा आम बजट
इस बार के बजट सत्र की सबसे बड़ी चर्चा 'रविवार' (1 फरवरी) को बजट पेश किए जाने को लेकर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इतिहास रचने की तैयारी में हैं, जब वे छुट्टी के दिन संसद में देश का लेखा-जोखा रखेंगी।
सरकार का तर्क है कि रविवार को बजट पेश करने से शेयर बाजार पर उस दिन तत्काल उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ेगा और आम लोगों को भी फुर्सत में बजट प्रावधानों को समझने का मौका मिलेगा।
वित्त मंत्रालय की ओर से तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और हलवा समारोह के साथ बजट की छपाई की प्रक्रिया भी अपने अंतिम चरण में है।
1 फरवरी की तारीख और रविवार का संयोग
1999 में जब बजट रविवार को पेश हुआ था, तब बजट पेश करने की तारीख फरवरी का आखिरी दिन (28 फरवरी या लीप ईयर में 27 फरवरी) हुआ करती थी।
2017 में मोदी सरकार ने बजट पेश करने की तारीख बदलकर 1 फरवरी कर दी। इसलिए, 1 फरवरी की तय तारीख पर रविवार को बजट पेश होने की घटना इतिहास में पहली बार हो रही है। 1999 में यह फरवरी के अंत में हुआ था।
मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार रविवार का बजट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के अब तक के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब बजट रविवार को पेश किया जा रहा है।
इससे पहले 2015, 2020 और 2025 में बजट शनिवार को पेश हुआ था, लेकिन रविवार को कभी नहीं। इस लिहाज से मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था और नई बजट परंपरा (1 फरवरी वाली) के तहत इसे "पहली बार" कहा जा रहा है।
डिजिटल बजट और रविवार का मेल
यह पहली बार है जब पूरी तरह से 'पेपरलेस डिजिटल बजट' रविवार के दिन पेश होगा। 1999 में बजट के दस्तावेज छपे हुए होते थे और तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी।
अब रविवार को बजट पेश होने का मतलब है कि आम जनता डिजिटल माध्यमों से रीयल-टाइम में इसे देख पाएगी, जो 1999 के दौर में संभव नहीं था।
शेयर बाजार का विशेष सत्र
यह भी पहली बार हो रहा है कि रविवार को बजट पेश होने के कारण स्टॉक एक्सचेंज (NSE और BSE) रविवार को ही विशेष ट्रेडिंग सत्र आयोजित कर रहे हैं।
1999 में रविवार को बजट पेश होने पर बाजार बंद था और उसका असर सोमवार को देखने को मिला था।
राष्ट्रपति के अभिभाषण में दिखेगा विकसित भारत का रोडमैप
आज होने वाले राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में उठाए गए कदमों पर जोर दे सकती है। अभिभाषण में अर्थव्यवस्था की मजबूती, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों को प्रमुखता मिल सकती है।
राष्ट्रपति के संबोधन के बाद संसद में 'धन्यवाद प्रस्ताव' पर चर्चा शुरू होगी, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।
सरकार की कोशिश होगी कि वह इस सत्र के माध्यम से देश को अपनी मजबूत आर्थिक नीतियों का संदेश दे।
आर्थिक सर्वेक्षण और भविष्य की चुनौतियां
बजट पेश होने से पहले संसद के पटल पर 'आर्थिक सर्वेक्षण' (Economic Survey) रखा जाएगा। यह दस्तावेज देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति का आईना होता है।
इसमें जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान, महंगाई की स्थिति और राजकोषीय घाटे जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के आर्थिक सर्वेक्षण में वैश्विक मंदी के खतरों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक लचीला बनाने के उपायों पर विशेष जोर दिया जा सकता है।
हंगामेदार सत्र के आसार और विपक्ष की रणनीति
संसद का यह सत्र काफी हंगामेदार रहने की उम्मीद है। विपक्ष ने बेरोजगारी, महंगाई, मणिपुर संकट और हाल ही में अधिकारियों के इस्तीफे जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
वहीं, सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह नियमों के तहत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री ने सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील की है।
सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और विधेयकों को भी पारित कराए जाने की संभावना है।
मध्यम वर्ग और किसानों को बड़ी उम्मीदें
रविवार को पेश होने वाले बजट से देश के मध्यम वर्ग और किसानों को विशेष उम्मीदें हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वित्त मंत्री टैक्स स्लैब में बदलाव कर इनकम टैक्स में राहत दे सकती हैं।
वहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कृषि क्षेत्र के बजट में भारी बढ़ोतरी की संभावना है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं।
पहली बार रविवार को बजट पेश होने के कारण पूरे देश की नजरें टीवी स्क्रीन पर टिकी रहेंगी कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इस बार किसके लिए क्या खास लेकर आती है।