देवभूमि में ऐतिहासिक फैसला: बदरी-केदार समेत BKTC के सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री होगी बैन!
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित अपने अधीन आने वाले सभी 45+ मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
यह फैसला सनातन परंपराओं की पवित्रता और धार्मिक शुचिता बनाए रखने के लिए लिया गया है।
हरिद्वार : उत्तराखंड की पावन देवभूमि में सनातन धर्म की मर्यादा और तीर्थों की पवित्रता को लेकर एक युगांतकारी निर्णय लिया गया है।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने घोषणा की है कि विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम सहित समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 45 से अधिक मंदिरों में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होगा।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब गंगोत्री धाम पहले ही इस तरह का प्रतिबंध लागू कर चुका है। इस निर्णय का उद्देश्य सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं को अक्षुण्ण रखना और आस्था के इन केंद्रों पर किसी भी प्रकार के 'अपवित्र' हस्तक्षेप को रोकना बताया गया है।
मंदिर समिति की बोर्ड बैठक में पारित होगा प्रस्ताव
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि इस महत्वपूर्ण निर्णय को औपचारिक रूप देने के लिए आगामी बोर्ड बैठक में एक विशेष प्रस्ताव लाया जाएगा।
अध्यक्ष के अनुसार, केदार खंड से लेकर मानस खंड तक स्थापित मंदिर श्रृंखला में परंपरागत रूप से केवल हिंदुओं के प्रवेश की ही मान्यता रही है, लेकिन समय के साथ इन नियमों में शिथिलता आई थी।
अब शासन और प्रशासन के सहयोग से इन प्राचीन मान्यताओं को कड़ाई से लागू किया जाएगा। समिति का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान है।
गंगोत्री धाम के बाद चारधामों में बढ़ी सख्ती
इस फैसले की पृष्ठभूमि में गंगोत्री मंदिर समिति का वह निर्णय भी शामिल है, जिसमें रविवार (25 जनवरी 2026) को हुई बैठक के बाद गंगोत्री धाम और मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल 'मुखबा' में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि धाम की शुचिता बनाए रखने के लिए यह कदम अनिवार्य था।
अब BKTC द्वारा इसी तरह के कड़े कदम उठाने की घोषणा के बाद उत्तराखंड के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों, जैसे यमुनोत्री और हरिद्वार के गंगा घाटों पर भी इसी तरह की पाबंदियां लगाने की मांग तेज हो गई है।
पवित्रता के साथ सुरक्षा और स्थानीय मांग पर जोर
इस प्रतिबंध के पीछे स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और पंडा समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग भी एक बड़ा कारण है।
कई हिंदूवादी संगठनों और स्थानीय निवासियों ने शिकायत की थी कि कुछ तत्व धार्मिक स्थलों पर मांस-मदिरा के सेवन या अन्य आपत्तिजनक गतिविधियों के माध्यम से धाम की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संकेत दिए हैं कि सरकार सनातन धर्म की आस्था के केंद्रों की पवित्रता बनाए रखने के लिए हर संभव ठोस कदम उठाएगी।
आने वाले समय में मंदिरों के बाहर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे और पहचान पत्रों की गहन जांच के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।