'अपने भाई को लेने आया हूं': पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर किया UAE राष्ट्रपति का भव्य स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल तोड़कर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का गर्मजोशी से स्वागत किया।

Updated On 2026-01-19 21:42:00 IST

राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की यह पांचवीं भारत यात्रा है।

नई दिल्ली: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच के प्रगाढ़ संबंधों ने आज एक बार फिर इतिहास रच दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीतिक प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की स्वयं अगवानी की।

प्रधानमंत्री ने उन्हें 'अपना भाई' बताते हुए गले लगाया, जो दोनों देशों के बीच केवल औपचारिक ही नहीं, बल्कि गहरे व्यक्तिगत संबंधों को भी दर्शाता है।

यह संक्षिप्त लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण दौरा वैश्विक राजनीति में भारत और यूएई की बढ़ती नजदीकियों का नया अध्याय है।

पालम एयरपोर्ट पर टूटा प्रोटोकॉल: मोदी ने लगाया गले

UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आज शाम करीब 4:20 बजे एक विशेष विमान से दिल्ली के पालम एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे।

सामान्य प्रोटोकॉल के तहत किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का स्वागत संबंधित विभाग के मंत्री करते हैं, लेकिन पीएम मोदी ने स्वयं एयरपोर्ट पहुंचकर सबको चौंका दिया।

जैसे ही राष्ट्रपति नाहयान विमान से उतरे, पीएम मोदी ने उन्हें गर्मजोशी से गले लगाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "अपने भाई, महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का स्वागत करने एयरपोर्ट गया। उनकी यह यात्रा भारत-यूएई की अटूट दोस्ती के प्रति उनके लगाव को दर्शाती है।"


2 घंटे का संक्षिप्त दौरा, फिर भी कूटनीतिक वजन भारी

राष्ट्रपति नाहयान का यह भारत दौरा समय के लिहाज से काफी छोटा है; वे दिल्ली में केवल 120 मिनट ही रुकेंगे। इतने कम समय के लिए किसी राष्ट्राध्यक्ष का भारत आना और खुद प्रधानमंत्री का उनकी अगवानी के लिए जाना यह संदेश देता है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत के मुद्दे कितने गंभीर और रणनीतिक हैं।


एयरपोर्ट से दोनों नेता एक ही कार में बैठकर लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के लिए रवाना हुए, जहा दोनों के बीच उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हुई।

पश्चिम एशिया में तनाव और 'बोर्ड ऑफ पीस' पर चर्चा

यह यात्रा एक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' को लेकर दोनों नेताओं के बीच अहम चर्चा हुई है।

भारत और यूएई दोनों ही इस शांति योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा, अगले महीने भारत में होने वाले 'AI इम्पैक्ट समिट' और ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के एजेंडे पर भी बातचीत की गई है।

दोनों देश रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में अपने सहयोग को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के तहत नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सहमत हुए हैं।

दशक भर की दोस्ती: 10 साल में पांचवीं भारत यात्रा

पिछले एक दशक में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की यह पांचवीं भारत यात्रा है और राष्ट्रपति बनने के बाद उनका यह तीसरा आधिकारिक दौरा है। भारत और यूएई के बीच 'स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली' और 'द्विपक्षीय निवेश संधि' जैसे महत्वपूर्ण समझौते पहले ही हो चुके हैं।

यूएई वर्तमान में भारत के शीर्ष व्यापारिक और निवेश भागीदारों में से एक है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति नाहयान की इस मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देश न केवल आर्थिक मोर्चे पर बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति के मुद्दे पर भी एक साथ मजबूती से खड़े हैं।

PM मोदी ने UAE राष्ट्रपति भेंट किए भारतीय हस्तशिल्प बने खास तोहफे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास लोक कल्याण मार्ग पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख जायद और उनके परिवार का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस विशेष अवसर पर पीएम मोदी ने अतिथियों को भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को दर्शाने वाले चुनिंदा उपहार भेंट किए।

राष्ट्रपति शेख जायद को गुजरात की शाही नक्काशीदार लकड़ी से बना एक आकर्षक झूला और कश्मीर की विश्व प्रसिद्ध पश्मीना शॉल भेंट की गई। यह शॉल तेलंगाना में बने चांदी के खूबसूरत डिब्बे में रखकर दी गई, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाती है। पश्मीना अपनी बारीक ऊन, हल्केपन और अत्यधिक गर्माहट के लिए दुनियाभर में जानी जाती है।

इसके साथ ही राष्ट्रपति की माता शेखा फातिमा बिंत मुबारक अल केतबी को भी एक शानदार पश्मीना शॉल के साथ कश्मीर घाटी का मशहूर केसर भेंट किया गया। कश्मीरी केसर अपनी गहरी लाल रंगत, अनोखी खुशबू और शुद्धता के कारण विश्व में सर्वोत्तम माना जाता है।

वहीं गुजराती शाही लकड़ी का झूला भारतीय कारीगरी की बारीकी और पारंपरिक शिल्प कला का जीवंत उदाहरण है। ये सभी उपहार केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और भारत–UAE के मजबूत रिश्तों का प्रतीक हैं।

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