BMC Election 2026: 'महायुति' का महा-विजय अभियान; बीएमसी में ढाई दशक बाद सत्ता परिवर्तन, पुणे-नागपुर में भी भगवा लहर
बीएमसी में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जबकि पुणे, नागपुर और ठाणे में भी विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया है। उद्धव और राज ठाकरे की एकता भी महायुति के विकासवाद को रोकने में नाकाम रही।
राज्य के 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों ने सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति के लिए 16 जनवरी 2026 का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। राज्य के 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों ने सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार के नेतृत्व वाली 'महायुति' ने मुंबई से लेकर विदर्भ तक अपना परचम लहराया है। सबसे बड़ी खबर 'देश की सबसे अमीर महानगरपालिका' बीएमसी से आई है, जहाँ बीजेपी और शिंदे की शिवसेना ने मिलकर बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है।
बीएमसी : मातोश्री के गढ़ में सेंध, बीजेपी बनी सबसे बड़ी पार्टी
मुंबई के 227 वार्डों के नतीजों ने शिवसेना (UBT) के ढाई दशक पुराने साम्राज्य को हिला कर रख दिया है।
सीटों का गणित: बीजेपी और शिंदे गुट की 'महायुति' ने 135 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है। बीजेपी अकेले 100 के करीब पहुंचकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
ठाकरे गठबंधन की हार: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने के बावजूद महाविकास अघाड़ी (MVA) 65 सीटों के आसपास सिमट गई है।
हाई-प्रोफाइल हार: नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक की हार और वर्ली-दादर जैसे गढ़ों में बीजेपी की पैठ ने यह साफ कर दिया है कि मुंबई का मतदाता अब विकास और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दे रहा है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़: अजीत पवार और बीजेपी का 'पावर प्ले', पश्चिमी महाराष्ट्र के आईटी हब पुणे में बीजेपी ने अपनी बढ़त बरकरार रखी है।
पुणे नगर निगम: यहां बीजेपी ने कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन को करारी शिकस्त दी है। 173 सीटों में से बीजेपी-महायुति गठबंधन ने 110 से अधिक सीटें जीतकर पुणे को अपना अभेद्य किला साबित किया है।
पिंपरी-चिंचवड़ : यहा भी विकास के नाम पर जनता ने महायुति को चुना। विपक्षी गठबंधन यहाँ केवल 35-40 सीटों पर ही अपनी मौजूदगी दर्ज करा सका।
नागपुर और अमरावती: विदर्भ में फडणवीस और गडकरी का दबदबा
विदर्भ क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी का एकतरफा प्रदर्शन देखने को मिला है।
नागपुर: संघ के मुख्यालय और देवेंद्र फडणवीस के गृहक्षेत्र नागपुर में बीजेपी ने 'क्लीन स्वीप' जैसी स्थिति पैदा कर दी है। यहाँ कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल तो रही, लेकिन सीटों का अंतर इतना बड़ा था कि मुकाबला एकतरफा नजर आया।
अमरावती: यहा भी महायुति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्थानीय निकायों पर कब्जा जमाया है। विदर्भ के किसानों और मध्यम वर्ग ने केंद्र व राज्य की कल्याणकारी योजनाओं पर मुहर लगाई है।
ठाणे और कल्याण-डोंबिवली: एकनाथ शिंदे का 'रियल शिवसेना' पर मोहर
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह जनपद ठाणे और आसपास के इलाकों में मुकाबला बेहद दिलचस्प था।
ठाणे नगर निगम: यहा एकनाथ शिंदे ने साबित कर दिया कि 'असली शिवसेना' का जनाधार उन्हीं के साथ है। शिंदे गुट ने यहाँ रिकॉर्ड सीटों के साथ जीत दर्ज की है। उद्धव ठाकरे गुट यहा तीसरे स्थान पर खिसक गया है।
कल्याण-डोंबिवली : श्रीकांत शिंदे के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में महायुति ने 80% से अधिक सीटों पर कब्जा जमाया है। यहा बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी के मुद्दे हावी रहे।
नासिक और मराठवाड़ा: संभाजीनगर में भी दिखा 'परिवर्तन'
नासिक (NMC): उत्तर महाराष्ट्र के इस महत्वपूर्ण शहर में त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद थी, लेकिन यहाँ भी बीजेपी-शिंदे गठबंधन ने बाजी मारी। राज ठाकरे की मनसे को यहाँ कुछ सीटों का फायदा जरूर हुआ, लेकिन वह सत्ता से दूर रही।
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): नाम परिवर्तन के बाद हुए पहले बड़े चुनाव में यहाँ हिंदुत्व के मुद्दे पर ध्रुवीकरण देखने को मिला। महायुति ने यहाँ ओवैसी की पार्टी (AIMIM) और उद्धव गुट को पीछे छोड़ते हुए स्पष्ट बढ़त बनाई।
चुनावी नतीजों का संदेश: 2027 की तैयारी शुरू
इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र में 'मराठी मानुष' का भावनात्मक कार्ड अब विकास और डबल इंजन सरकार के कामकाज के सामने फीका पड़ रहा है। 'लाड़ली बहना' जैसी योजनाओं और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार ने शहरी मतदाताओं को महायुति की ओर मोड़ा है।
इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव का 'ट्रेलर' माना जा रहा है, जहाँ अब महाविकास अघाड़ी को अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा।