BMC 2026 Election Exit Poll: मुंबई में 'महायुति' की प्रचंड लहर; उद्धव गुट को बड़ा झटका!
बीएमसी चुनाव 2026 के एग्जिट पोल में बीजेपी नीत 'महायुति' को 138 सीटों के साथ बड़ी जीत का अनुमान जताया गया है।
अब सबकी नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं कि क्या मुंबई का 'राजा' वाकई महायुति बनने जा रही है
महाराष्ट्र: मुंबई महानगरपालिका के बहुप्रतीक्षित चुनावों के बाद सामने आए एग्जिट पोल के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली 'महायुति' गठबंधन मुंबई नगर निगम पर कब्जा करने की ओर मजबूती से बढ़ रही है।
अनुमानों के मुताबिक, महायुति को 227 सीटों वाली बीएमसी में 138 सीटों के साथ शानदार जीत मिल सकती है। दूसरी ओर, दशकों तक बीएमसी की सत्ता पर काबिज रहने वाली शिवसेना यानी उद्धव ठाकरे गुट को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ सकता है।
महायुति का 'क्लीन स्वीप' और बीजेपी का दबदबा
एग्जिट पोल के रुझान बताते हैं कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महायुति ने मुंबई के मतदाताओं का भरोसा जीतने में सफलता हासिल की है।
138 सीटों का अनुमान यह दर्शाता है कि गठबंधन न केवल बहुमत के आंकड़े (114) को पार कर रहा है, बल्कि एकतरफा जीत की ओर है। बीजेपी इस गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती दिख रही है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भी अपने प्रभाव वाले इलाकों में बेहतर प्रदर्शन किया है।
विकास के मुद्दों और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स को इस संभावित जीत का मुख्य कारण माना जा रहा है।
ठाकरे परिवार के लिए खतरे की घंटी
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी के लिए ये नतीजे चिंताजनक हैं। एग्जिट पोल के अनुसार, शिवसेना (UBT), कांग्रेस और शरद पवार गुट के गठबंधन को केवल 59 सीटें मिलने का अनुमान है।
यदि ये नतीजे वास्तविक परिणामों में बदलते हैं, तो यह ठाकरे परिवार के राजनीतिक प्रभाव के लिए सबसे बड़ा झटका होगा, क्योंकि बीएमसी को लंबे समय से शिवसेना का 'शक्ति केंद्र' माना जाता रहा है। कांग्रेस और एनसीपी का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने का अनुमान लगाया गया है।
राज ठाकरे की मनसे और अन्य की स्थिति
एग्जिट पोल में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को कुछ खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। अन्य छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में भी बहुत कम सीटें जाने का अनुमान है।
ऐसा प्रतीत होता है कि मुंबई की जनता ने इस बार महायुति और एमवीए के बीच सीधे मुकाबले में स्पष्ट रूप से महायुति को प्राथमिकता दी है।
मराठी कार्ड और हिंदुत्व के मुद्दों पर भी महायुति का पलड़ा भारी पड़ता नजर आ रहा है।
क्या कहते हैं चुनावी विशेषज्ञ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में मुंबई में हुए मेट्रो के काम, तटीय सड़क और जी-20 जैसे आयोजनों ने महायुति के पक्ष में सकारात्मक माहौल बनाया।
वहीं, शिवसेना के दो फाड़ होने का सबसे ज्यादा नुकसान उद्धव ठाकरे को उठाना पड़ रहा है। हालांकि, यह केवल एग्जिट पोल के अनुमान हैं और अंतिम परिणाम आने तक सभी दलों की सांसें अटकी हुई हैं। अब सबकी नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं कि क्या मुंबई का 'राजा' वाकई महायुति बनने जा रही है