Craving Problem: रात में बार-बार क्रेविंग महसूस होती है? इन तरीकों से पा सकते हैं इस पर काबू
Craving Problem: बहुत से लोगों को रात में क्रेविंग की समस्या परेशान करती है। कुछ तरीकों से इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है।
क्रेविंग से निजात पाने के आसान टिप्स।
Craving Problem: दिनभर संतुलित खाना खाने के बावजूद अगर रात होते ही कुछ न कुछ खाने की तलब लगने लगे, तो यह सिर्फ भूख नहीं बल्कि एक आदत या शरीर का संकेत भी हो सकता है। खासतौर पर मीठा, चिप्स या तला-भुना खाने की क्रेविंग रात में ज्यादा परेशान करती है, जिससे वजन बढ़ने और नींद खराब होने का खतरा रहता है।
रात की क्रेविंग को हल्के में लेना सही नहीं है, क्योंकि यह आपकी लाइफस्टाइल, डाइट और मेंटल हेल्थ से जुड़ी हो सकती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान और असरदार तरीकों को अपनाकर आप इस आदत पर काबू पा सकते हैं और हेल्दी रूटीन बना सकते हैं।
रात में क्रेविंग क्यों होती है?
रात में बार-बार खाने का मन होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दिन में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर न लेना, अनियमित भोजन, ज्यादा तनाव, नींद की कमी और लंबे समय तक खाली पेट रहना इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा देर रात मोबाइल या टीवी देखते हुए स्नैकिंग की आदत भी क्रेविंग को बढ़ाती है।
डिनर में संतुलित आहार लें: अगर डिनर हल्का लेकिन पौष्टिक होगा, तो रात में भूख कम लगेगी। खाने में प्रोटीन (दाल, पनीर, अंडा), फाइबर (सब्जियां, सलाद) और हेल्दी फैट शामिल करें। सिर्फ कार्बोहाइड्रेट पर आधारित भोजन जल्दी पच जाता है और दोबारा भूख लगती है।
पर्याप्त पानी पीना है जरूरी: कई बार प्यास को हम भूख समझ लेते हैं। रात में अगर कुछ खाने का मन हो, तो पहले एक गिलास गुनगुना पानी पिएं। इससे पेट भरा महसूस होगा और अनावश्यक खाने से बचाव होगा।
हेल्दी स्नैक्स रखें विकल्प में: अगर क्रेविंग बहुत ज्यादा हो, तो जंक फूड की बजाय हेल्दी विकल्प चुनें। जैसे भुने चने, मखाने, फल, नट्स या दही। ये शरीर को पोषण देते हैं और ज्यादा कैलोरी भी नहीं बढ़ाते।
तनाव और नींद पर दें ध्यान: तनाव और खराब नींद हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है, जिससे भूख बढ़ती है। रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें और सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करें। हल्की स्ट्रेचिंग या मेडिटेशन भी मददगार हो सकता है।
खाने का समय तय करें: हर दिन एक तय समय पर डिनर करने की आदत डालें और देर रात खाने से बचें। अगर शरीर को समय की आदत हो जाती है, तो क्रेविंग अपने आप कम होने लगती है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
अगर आपको यह खबर उपयोगी लगी हो, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें और हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए [haribhoomi.com] के साथ।