Toyota Recall: टोयोटा ने अमेरिका में डेढ़ लाख से ज्यादा पिकअप ट्रक वापस मंगाए, जानें डिटेल
टोयोटा ने बताया है कि रिकॉल से प्रभावित ट्रकों में तीन बड़ी दिक्कतें सामने आई हैं। जिनमें कार का मल्टीमीडिया डिस्प्ले अचानक फ्रीज हो जाना या पूरी तरह ब्लैकआउट हो जाना भी शामिल है।
टोयोटा पिकअप ट्रक रिकॉल
Toyota Recall: दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी टोयोटा (Toyota) ने अमेरिका में अपने पॉपुलर पिकअप ट्रक Toyota Tundra और Tundra Hybrid की लगभग 1,62,000 यूनिट्स को रिकॉल करने का फैसला लिया है। यह कदम ट्रकों के मल्टीमीडिया डिस्प्ले सिस्टम और रिवर्स कैमरा में गंभीर तकनीकी खराबी सामने आने के बाद उठाया गया है। कंपनी के मुताबिक, यह समस्या ड्राइविंग सेफ्टी से जुड़ी है, इसलिए एहतियातन गाड़ियों को वापस बुलाया जा रहा है।
क्या है पूरी समस्या
टोयोटा की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रभावित ट्रकों में मुख्य रूप से तीन बड़ी दिक्कतें सामने आई हैं। पहली, कार का मल्टीमीडिया डिस्प्ले अचानक फ्रीज हो जाना या पूरी तरह ब्लैकआउट हो जाना। दूसरी, रिवर्स गियर डालने पर रिवर्स कैमरा का काम न करना, जिससे स्क्रीन पर पीछे का दृश्य दिखाई नहीं देता। तीसरी और सबसे गंभीर समस्या यह है कि बिना रियरव्यू कैमरे के वाहन चलाना सुरक्षा मानकों के खिलाफ है, जिससे खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
किन गाड़ियों पर पड़ेगा असर
यह रिकॉल मुख्य रूप से 2024 और 2025 मॉडल ईयर की Toyota Tundra और Tundra Hybrid गाड़ियों के लिए जारी किया गया है। कंपनी का कहना है कि इन मॉडल्स में इस्तेमाल की गई स्क्रीन यूनिट्स में सॉफ्टवेयर से जुड़ी बड़ी खामी पाई गई है।
ग्राहकों को क्या करना होगा
टोयोटा ने बताया है कि वह मार्च के अंत तक प्रभावित ग्राहकों से संपर्क करना शुरू कर देगी। फिलहाल यह साफ नहीं किया गया है कि समस्या को सॉफ्टवेयर अपडेट से ठीक किया जाएगा या फिर किसी हार्डवेयर पार्ट को बदला जाएगा।
Toyota और रिकॉल का इतिहास
बीते कुछ महीनों में Toyota Tundra को कई बार रिकॉल किया जा चुका है। नवंबर 2025 में इंजन खराबी के चलते 1.27 लाख ट्रक, अक्टूबर 2025 में सॉफ्टवेयर समस्या के कारण 3.94 लाख गाड़ियां और मई 2025 में रिवर्स लाइट फेलियर के चलते 4.43 लाख ट्रक वापस बुलाए गए थे।
सॉफ्टवेयर बन रहा है बड़ी चुनौती
साल 2025 में टोयोटा ने कुल 32 लाख गाड़ियों को अलग-अलग कारणों से रिकॉल किया। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे गाड़ियां हाई-टेक और सॉफ्टवेयर-डिपेंडेंट होती जा रही हैं, इस तरह की इलेक्ट्रॉनिक समस्याएं ऑटो कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
(मंजू कुमारी)