नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी वायुसेना का एक विशाल रिफ्यूलिंग विमान KC-135 इराक के हवाई क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान में पांच क्रू मेंबर सवार थे, जिनके लिए फिलहाल बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' के दौरान हुआ हादसा
अमेरिकी सेना द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, यह विमान ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' का हिस्सा था, जो ईरान के खिलाफ चल रही व्यापक सैन्य कार्रवाई का एक प्रमुख मिशन है।
बता दें कि KC-135 विमान का उपयोग लंबी दूरी के अभियानों के दौरान हवा में ही लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने के लिए किया जाता है।
सेना ने स्पष्ट किया है कि यह दुर्घटना 'फ्रेंडली एयरस्पेस' में हुई है। शुरुआती जांच के अनुसार, विमान न तो दुश्मन की गोलीबारी का शिकार हुआ है और न ही यह 'फ्रेंडली फायर' की घटना है। कुल दो विमानों ने उड़ान भरी थी, जिनमें से एक सुरक्षित लैंड कर गया, जबकि दूसरा क्रैश हो गया।
क्षेत्रीय तनाव और अमेरिकी सैनिकों की बढ़ती हताहतें
विमान दुर्घटना ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में जंग एक व्यापक क्षेत्रीय सैन्य ऑपरेशन में तब्दील हो चुकी है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस ऑपरेशन के बाद से अब तक के आंकड़े काफी चिंताजनक है।
ईरान के खिलाफ इस युद्ध में अब तक सात अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। हमलों की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 150 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।
ईरान जंग का आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
पेंटागन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के शुरुआती महज छह दिनों में ही अमेरिका ने 11.3 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि खर्च कर दी है। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा गोला-बारूद और हथियारों की आपूर्ति पर व्यय हुआ है।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बहरीन की अगुवाई में एक प्रस्ताव पारित कर ईरान से खाड़ी देशों पर हमले तुरंत रोकने की मांग की है। हालांकि, रूस और चीन ने इस वोटिंग प्रक्रिया से खुद को दूर रखा है।