Iran-Israel Conflict: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालात अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब तुर्की भी खुलकर मैदान में उतर आया है। तुर्की ने दावा किया है कि उसने पूर्वी भूमध्य सागर में ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही इंटरसेप्ट कर समंदर में गिरा दिया।
इसके साथ ही तुर्की ने उत्तरी साइप्रस में अपने एफ-16 फाइटर जेट्स और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिए हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे इलाके में युद्ध के खतरे को और बढ़ा दिया है और साइप्रस अब इस संघर्ष का नया फ्लैशपॉइंट बनता दिख रहा है।
ईरानी खतरों को देखते हुए तुर्की ने अपनी सैन्य तैयारियों को और अधिक पुख्ता करते हुए अपने नियंत्रण वाले उत्तरी साइप्रस में 6 एफ-16 (F-16) फाइटर जेट्स और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिए हैं।
तुर्की को यह डर सता रहा है कि ईरान या उसके समर्थक संगठन उत्तरी साइप्रस में स्थित उसके ठिकानों को निशाना बना सकते हैं, इसलिए इलाके की सुरक्षा मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वे इलाके की सुरक्षा और आम लोगों की जान जोखिम में डालने वाले कदम न उठाएं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तुर्की की चेतावनियों को मानना सभी के हित में है और अपने हितों की रक्षा के लिए तुर्की बिना किसी झिझक के जरूरी कदम उठाता रहेगा।
इस बीच भूमध्य सागर में स्थित साइप्रस द्वीप अब युद्ध का नया फ्लैशपॉइंट बन गया है, जहाँ 1 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा ब्रिटिश एयरबेस पर किए गए ड्रोन हमलों के बाद ग्रीस ने भी साइप्रस के समर्थन में 4 एफ-16 जेट्स तैनात कर दिए हैं।
तुर्की, जो एक नाटो (NATO) सदस्य और सुन्नी प्रधान मुल्क है, पहले से ही शिया बहुल ईरान के साथ क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा रखता है। अब ईरान और इजरायल-अमेरिका की जंग में तुर्की की इस सक्रिय भूमिका ने वैश्विक कूटनीति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।