अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के पांचवें दिन हिंद महासागर में बड़ा समुद्री हमला हुआ है। अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी नौसेना के युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो हमला करके डुबो दिया। यह घटना श्रीलंका के दक्षिणी तट से करीब 40 समुद्री मील (लगभग 75 किलोमीटर) दूर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में कम से कम 80 ईरानी नौसैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हमले की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी फ्रिगेट को टॉरपीडो से निशाना बनाया। हेगसेथ के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी दुश्मन युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोया गया है।
जहाज पर 180 नौसैनिक थे सवार
श्रीलंकाई अधिकारियों के मुताबिक जब हमला हुआ तब युद्धपोत पर करीब 180 ईरानी नौसैनिक मौजूद थे। हमले के बाद जहाज से संकट संकेत (Distress Signal) जारी किया गया, जिसके बाद श्रीलंका की नौसेना ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
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— Department of War 🇺🇸 (@DeptofWar) March 4, 2026
श्रीलंका ने बचाए घायल नौसैनिक
श्रीलंका की नौसेना ने भारतीय समयानुसार सुबह 6 से 7 बजे के बीच मिले संकट संदेश के बाद खोज और बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 32 घायल ईरानी नौसैनिकों को बचाकर गाले के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई नौसैनिक अब भी समुद्र में लापता बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश जारी है।
भारत से लौट रहा था युद्धपोत
बताया जा रहा है कि यह ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena हाल ही में भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित 2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (MILAN अभ्यास) में हिस्सा लेने के बाद ईरान लौट रहा था। इसी दौरान हिंद महासागर में उस पर यह घातक हमला हुआ।
हिंद महासागर तक पहुंचा युद्ध
इस घटना के बाद अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब हिंद महासागर तक फैलता दिखाई दे रहा है। क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां तेज हो गई हैं और ईरानी नौसेना भी हाई अलर्ट पर बताई जा रही है।
श्रीलंकाई नेवी का रेस्क्यू ऑपरेशन: 32 नाविकों को बचाया
हमले की सूचना मिलते ही श्रीलंकाई नेवी ने अपने राहत और बचाव पोतों को घटना स्थल की ओर रवाना किया। नौसेना ने अब तक जहाज से 32 घायल नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कई अन्य लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए समुद्र में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान को भारी नुकसान
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जारी इस जंग को 'एपिक फ्यूरी' नाम दिया है, जिसका अर्थ 'भयंकर गुस्सा' है। अमेरिकी दावों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में ईरान के 17 जहाजों को तबाह किया जा चुका है, जिनमें एक पनडुब्बी भी शामिल है।
इस पूरे ऑपरेशन में 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, 200 फाइटर जेट और दो विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हैं। अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल ठिकानों और ड्रोन यूनिट्स को पूरी तरह नष्ट करना है।
लेबनान में मानवीय संकट: 65 हजार लोग विस्थापित
इजरायली हमलों के कारण न केवल ईरान बल्कि लेबनान में भी स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। लेबनान की सामाजिक मामलों की मंत्री हनीन सैयद के अनुसार, अब तक करीब 65 हजार लोग अपने घरों को छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।
इसके अतिरिक्त 10 से 20 हजार लोग अभी भी सुरक्षित रास्तों की तलाश में हैं। लोग काफी चिंतित हैं क्योंकि 2024 के युद्ध की यादें अब भी ताजा हैं, जब ड्रोन और धमाकों की आवाजें रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई थीं।
सीरिया ने बंद की लेबनान सीमा, हमलों की चेतावनी
युद्ध के और अधिक फैलने की आशंका के बीच सीरिया ने लेबनान से लगने वाली अपनी 'जदेइदेत याबूस' बॉर्डर क्रॉसिंग को बंद कर दिया है। इजरायल ने चेतावनी दी थी कि उसकी सेना इस बॉर्डर क्रॉसिंग को निशाना बना सकती है, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से लोगों के बाहर जाने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, लेबनान से सीरिया आने वाले नागरिकों के लिए सीमा फिलहाल खुली रखी गई है ताकि मानवीय आधार पर उन्हें प्रवेश मिल सके।









