नई दिल्ली : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उपजे नेतृत्व के शून्य को भरने के लिए उनके दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई को नया 'सुप्रीम लीडर' चुन लिया गया है। ईरान की शक्तिशाली 'असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स', जिसमें 88 वरिष्ठ मौलवी शामिल हैं, ने इस महत्वपूर्ण पद के लिए मोजतबा के नाम पर अपनी स्वीकृति दी है। देश में जारी भीषण युद्ध और सुरक्षा कारणों के मद्देनजर यह पूरी चयन प्रक्रिया ऑनलाइन वोटिंग के जरिए गोपनीय तरीके से पूरी की गई।
मोजतबा खामेनेई का अभिषेक और पिता की गुप्त योजना
मोजतबा खामेनेई का चयन कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि इसके लिए अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहले ही जमीन तैयार कर दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई ने अपनी बीमारी के चलते साल 2024 में ही मोजतबा को अपना उत्तराधिकारी नामित कर दिया था।
सितंबर 2024 में उन्होंने असेंबली के 60 खास सदस्यों की एक गोपनीय बैठक बुलाकर मोजतबा के पक्ष में फैसला लेने के निर्देश दिए थे। मोजतबा को उनके पिता के ऑफिस में पहले से ही एक अहम रोल में देखा जाता था, जहाँ वे पर्दे के पीछे से ईरान के पूरे सिक्योरिटी सिस्टम को मैनेज करते थे।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई: जन्म, शिक्षा और राजनीतिक सफर
मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था। वे अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं और उन्होंने अपनी धार्मिक शिक्षा अपने पिता और वरिष्ठ मौलवियों की देखरेख में प्राप्त की है।
वे पहली बार 2009 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब उन्होंने ईरान में हुए विवादित राष्ट्रपति चुनावों के बाद भड़के विरोध प्रदर्शनों को अत्यंत सख्ती और क्रूरता से कुचल दिया था। इस घटना के बाद से ही उन्हें एक कट्टरपंथी और प्रभावशाली नेता के रूप में देखा जाने लगा, जो व्यवस्था को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
कट्टरपंथी विचारधारा और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) पर नियंत्रण
मोजतबा खामेनेई को उनकी "हार्डलाइन" यानी कट्टरपंथी सोच के लिए जाना जाता है। उनका इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और ईरान के खुफिया तंत्र पर जबरदस्त प्रभाव है। वे अक्सर पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में चुनावों के राजनीतिक नतीजों को मैनेज करने के आरोपों के कारण उनकी चर्चा और बढ़ी है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नियुक्ति से ईरान में कट्टरपंथी गुटों की पकड़ और मजबूत होगी, हालांकि इससे जनता के भीतर असंतोष भड़कने का खतरा भी बना हुआ है।
युद्ध के बीच नेतृत्व और भविष्य की अग्निपरीक्षा
मोजतबा खामेनेई ने एक ऐसे समय में ईरान की कमान संभाली है जब देश अमेरिका और इजरायल के भीषण हमलों का सामना कर रहा है। अमेरिकी सेना के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत अब तक ईरान के लगभग 2,000 ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है।
अमेरिकी दावों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में 200 फाइटर जेट्स और 50 हजार से ज्यादा सैनिक शामिल हैं। ऐसे में नए सुप्रीम लीडर के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल अपनी सत्ता को बचाना है, बल्कि ईरान को इस विनाशकारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय दबाव से बाहर निकालना भी है।










