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इजराइल-ईरान युद्ध के कारण सप्लाई रूट बंद होने से भारत के पास केवल 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार शेष है।

नई दिल्ली : इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के कारण प्रमुख तेल आयात मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिससे भारत के पास कच्चे तेल और रिफाइंड तेल का भंडार तेजी से कम हो रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, भारत के पास अब केवल 25 दिनों का तेल स्टॉक बचा है।

​स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का खतरा और सप्लाई ठप

​ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद करने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि इस रूट से गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए जीवनरेखा माना जाता है और इसके बंद होने से दुनिया भर में तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

​ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार की इमरजेंसी बैठकें

​देश की एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर सरकारी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों और सरकारी रिफाइनरी प्रमुखों ने दिल्ली में एक इमरजेंसी मीटिंग कर वैकल्पिक तेल सप्लायर्स की तलाश शुरू कर दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी वरिष्ठ अधिकारियों और तेल कंपनियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग की है ताकि कच्चे तेल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

​वैकल्पिक सप्लायर के रूप में रूस पर बढ़ा फोकस

​पश्चिमी एशिया पर अपनी 85% निर्भरता को कम करने के लिए भारत सरकार ने अब फिर से रूस की ओर रुख किया है। भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का प्लान बना रहा है क्योंकि रूस बेंचमार्क कीमतों से डिस्काउंट पर तेल ऑफर करता है। इसके अलावा, सरकार अफ्रीकी देशों जैसे वैकल्पिक रास्तों पर भी फोकस बढ़ा रही है।

​समुद्र में खड़े रूसी तेल टैंकरों को खरीदने की तैयारी

​सप्लाई में अचानक आने वाली कमी से निपटने के लिए भारत उन रूसी तेल टैंकरों को खरीदने पर विचार कर रहा है जो फिलहाल भारतीय समुद्र या एशियाई जल क्षेत्र में 'वेटिंग मोड' में खड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल इन टैंकरों में मौजूद है। इन्हें तुरंत रिसीव करने से ट्रांसपोर्टेशन का समय और लागत दोनों कम होगी और घरेलू मांग को तत्काल सहारा मिलेगा।

​शिपिंग रूट बदलने से बढ़ी लॉजिस्टिक और इंश्योरेंस लागत

​मौजूदा तनाव के कारण जहाजों को अपने पारंपरिक रूट बदलने पड़ रहे हैं, जिससे ट्रांजिट टाइम काफी बढ़ गया है। लॉजिस्टिक ऑपरेटरों के अनुसार, माल ढुलाई और इंश्योरेंस की लागत में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

​आम जनता को राहत: फिलहाल दाम बढ़ाने का कोई इरादा नहीं

​तेल संकट के बावजूद भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई विचार नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है। सरकार देश में प्रमुख पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की उपलब्धता और किफायती दाम तय करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है।

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