पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग का असर अब पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। सबसे ज्यादा दबाव पाकिस्तान पर पड़ा है, जिसकी पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था अब गंभीर संकट में फंसती नजर आ रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई बाधित होने के खतरे के बीच पाकिस्तान सरकार ने देश में ‘इमरजेंसी मोड’ लागू कर दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हालात से निपटने के लिए 13 सूत्रीय पैनिक प्लान लागू करते हुए स्कूल-कॉलेज बंद करने, वर्क फ्रॉम होम लागू करने और नेताओं-अफसरों की सैलरी में 25% कटौती जैसे कड़े फैसले किए हैं।
स्कूल-कॉलेज बंद और वर्क फ्रॉम होम लागू
बढ़ते ऊर्जा संकट और ईंधन की खपत कम करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने बड़े फैसले लिए हैं। देश के सभी स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया है।
इसके साथ ही, सरकारी और निजी दफ्तरों के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' अनिवार्य कर दिया गया है ताकि सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही कम हो और पेट्रोल-डीजल की बचत की जा सके।
नेताओं और अफसरों की सैलरी में 25% की कटौती
आर्थिक मोर्चे पर डैमेज कंट्रोल के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंत्रियों, सांसदों और वरिष्ठ नौकरशाहों की सैलरी में 25 फीसदी तक की भारी कटौती का ऐलान किया है। सरकार का मानना है कि इस बचत का उपयोग युद्ध के कारण बढ़ी हुई महंगाई और तेल आयात के अतिरिक्त बोझ को कम करने में किया जाएगा।
तेल और बिजली पर कड़े प्रतिबंध
ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम $100 प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं, जिसका सीधा असर पाकिस्तान की ईंधन सप्लाई पर पड़ा है:-
गैस और पेट्रोल की राशनिंग: घरेलू गैस की बुकिंग के लिए अब लंबा इंतजार करना होगा और पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू कर दी गई है।
बिजली की बचत: बाजारों को शाम होते ही बंद करने का आदेश दिया गया है ताकि बिजली की खपत कम की जा सके।
शादी-समारोहों पर रोक: बड़े सार्वजनिक आयोजनों और शादी-समारोहों में फिजूलखर्ची और बिजली के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता
पाकिस्तान की चिंता का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहाँ से वैश्विक तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा इस रास्ते को बंद करने की धमकी के बाद पाकिस्तान को डर है कि उसकी तेल सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है। इसी डर के कारण देश में खाद्य वस्तुओं और आवश्यक सेवाओं की कीमतों में भी भारी उछाल देखा जा रहा है।