अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सोमवार रात जोरदार धमाकों से दहशत फैल गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने शहर के कई इलाकों में एयरस्ट्राइक की।
बताया जा रहा है कि दारुलअमान, अरजान कीमत, खैरखाना और काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास धमाकों की आवाजें सुनी गईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एक नशा मुक्ति केंद्र (ड्रग रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल) भी हमले की चपेट में आया।
रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में सैकड़ों लोगों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
तालिबान सरकार के प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल के एक बड़े एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल को निशाना बनाया और अफगानिस्तान के एयरस्पेस का उल्लंघन किया। तालिबान ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है।
वहीं पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि किसी अस्पताल या नागरिक ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया और कार्रवाई केवल आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ की गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटना फरवरी 2026 से बढ़े अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव और सीमा पार संघर्ष का हिस्सा मानी जा रही है।
नशा मुक्ति केंद्र बना कब्रिस्तान: सोते हुए मरीजों पर गिरे बम
निशाना बनाया गया अस्पताल 2000 बिस्तरों वाला एक विशाल केंद्र था, जो मुख्य रूप से नशा मुक्ति और पुनर्वास के लिए समर्पित था। जिस समय एयरस्ट्राइक हुई, उस समय अस्पताल में सैकड़ों की संख्या में नशे के आदी लोग अपना इलाज करा रहे थे।
शहबाज शरीफ का खंडन: "हमने कोई हमला नहीं किया"
हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर घिरे पाकिस्तान ने सफाई पेश की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक आधिकारिक बयान जारी कर काबुल में एयरस्ट्राइक की खबरों को 'निराधार और बेबुनियाद' बताया है।
शरीफ का कहना है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करता है और किसी भी नागरिक ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया है। हालाँकि, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने यह जरूर कहा कि वे अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए 'आतंकी ठिकानों' के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार रखते हैं, लेकिन अस्पताल पर हमले के दावों को उन्होंने पूरी तरह नकार दिया है।
डूरंड लाइन पर खूनी संघर्ष: क्या युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं दोनों देश?
यह हमला उस वक्त हुआ है जब डूरंड लाइन पर पिछले तीन हफ्तों से दोनों देशों की सेनाओं के बीच भारी गोलीबारी जारी है। अफगानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तान लगातार उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद तालिबान सरकार 'जैसे को तैसा' वाली नीति अपना सकती है, जिससे दक्षिण एशिया में एक बड़े युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना को 'युद्ध अपराध' बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।