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Kuwait Fire Massive Negligence: कुवैत में हुए भयानक अग्निकांड में भारत के 45 लोगों की जान चली गई। इस हादसे के बाद बड़ी लापरवाही सामने आई है।

Kuwait Fire Massive Negligence:कुवैत में हुए भयानक अग्निकांड में भारत के 45 लोगों की जान चली गई। इस हादसे के बाद बड़ी लापरवाही सामने आई है। कुवैत के अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में कुल 49 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 45 भारतीय हैं और तीन फिलीपींस के नागरिक हैं। एक शव की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, सात मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर 24 से ज्यादा गैस सिलेंडर, कागज, कार्डबोर्ड और प्लास्टिक जैसी ज्वलनशील चीजें रखी हुई थीं। इस कारण आग तेजी से फैली और धुआं पूरे इमारत में भर गया।

ताला लगा होने के कारण मजदूर भाग नहीं सके
इस आग का मुख्य कारण ग्राउंड फ्लोर पर हुई शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि इमारत के दरवाजे ताले लगे हुए थे। इस वजह से लोग बाहर नहीं निकल सके। घटना में बचे लोगों ने बताया कि 24 से ज्यादा गैस सिलेंडर रखे होने के कारण आग और भी ज्यादा बढ़ गई। आग फैलने के बाद सिलेंडर में विस्फोट होना शुरू हो गया। ऐसे में आग काफी तेजी के साथ फैलने लगी। बताया जा रहा है कि मजदूरों ने खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर यहां रखे थे। इन सिलेंडर को अवैध ढंग से ब्लैक मार्केट से खरीदने की भी बात कही जा रही है। 

बिल्डिंग कोड का हुआ था उल्लंघन
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इमारत के अंदर ज्यादा जगह बनाने के लिए बिल्डिंग कोड के नियमों का उल्लंघन किया गया था। इमारत में ज्यादा से ज्यादा मजदूराें काे ठहराया जा सके इसलिए बिनास इजाजत इसके नक्शे को बदला गया था। साफ तौर पर कुवैत के बिल्डिंग कोड का उल्लंघन करते हुए ऐसा किया गया। यही वजह रही कि जब दमकल कर्मी आग बुझाने के लिए पहुंचे तो उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिल्डिंग के कमरे भी काफी छोटे थे और हर कमरे में कुवैत बिल्डिंग कोड के तय मानकों से ज्यादा मजदूर रह रहे थे। 

छत पर ताला लगा था जिससे फंस गए मजदूर
जिस इमारत में आग लगी उसका एग्जिट डोर भी काफी संकरा था। इसके साथ ही छत पर पहुंचने का रास्ता भी बंद था। उपरी मंजिल तक पहुंचने वाले दरवाले पर ताला लगा दिया गया था। इसके कारण जब बिल्डिंग में आग लगी और ऊपरी मंजलों पर रहने वाले मजदूर चाह कर भी छत पर नहीं पहुंच सके। यह मजदूर फंस कर रह गए क्योंकि ना तो यह ऊपर जा सकते थे और ना ही नीचे। इनमें से कई मजदूर ऐसे रहे जो पहले दम घुटने के कारण बेहोश हुए और बेहोशी की अवस्था में ही आग की चपेट में आने के कारण जलकर उनकी मौत हो गई। 

अवैध ढंग से मकान में हेरफेर करने वालों पर एक्शन
इस हादसे के बाद कुवैत के अधिकारियों ने अवैध ढंग से बिल्डिंग के नक्शे में हेरफेर करने वाले मकान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। बिल्डिंग प्लान की जांच शुरू कर दी गई है। खास तौर पर ऐसी इमारतों की जांच की जा रही है जहां पर मजदूरों को ठहराया गया है। बता दें कि कुवैत में ज्यादातर मजदूरों को बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स में ठहराया जाता है। ऐसी बिल्डिंग्स में सुविधाओं का अभाव होता है। इन इमारतों में खाना बनाने के लिए हर कमरे में अलग अलग किचन की व्यवस्था में नही होती बल्कि एक ही कॉमन किचन का इस्तेमाल किया जाता है। मजदूर अपनी बारी का इंतजार करते हुए एक- एक कर खाना पकाते हैं।

एनबीटीसी कंपनी देगी मृतकों और घायलों को मुआवजा
कुवैत सरकार से निर्दश मिलने के बाद एनबीटीसी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अग्निकांड में जलकर मरने वाले और गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों को आठ लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही कुवैत के किंग ने भी मुआवजे का ऐलान किया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कुवैत सरकार अग्निकांड के मृतकों को मुआवजे के तौर पर कितना पैसा देगी। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने शुक्रवार को कुवैत में जलकर मरे सभी मजदूरों के शवों के साथ केरल लौटने के बाद कहा कि कुवैत के किंग ने भी इस हादसे में जान गंवाने वालों के लिए मुआवजे की घोषणा की है।

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