ब्रिटेन द्वारा आयोजित 60 देशों की उच्चस्तरीय बैठक में भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने की मांग की है। भारत ने जोर देकर कहा कि इस युद्ध में केवल उसके नाविकों ने अपनी जान गंवाई है।

Global Energy Crisis: लंदन में आयोजित एक वर्चुअल समिट में, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ समेत 60 से अधिक देश शामिल थे, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रतिनिधित्व किया। भारत ने इस मंच का उपयोग दुनिया को यह बताने के लिए किया कि इस युद्ध की सबसे बड़ी मानवीय कीमत भारत चुका रहा है।

विदेश सचिव ने कहा, "भारत इकलौता ऐसा देश है जिसने खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में अपने नागरिकों को खोया है।" भारत ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं कर रहा, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध आवाजाही के सिद्धांत पर कोई समझौता नहीं करेगा।

​3 नाविकों की मौत और 1 लापता: भारत का बढ़ता आक्रोश 
खबरों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुए हमलों में अब तक 3 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और एक अभी भी लापता है। ये नाविक विदेशी झंडे वाले व्यापारिक जहाजों पर तैनात थे, जिन्हें ईरानी ड्रोन या मिसाइलों ने निशाना बनाया था।

भारत ने इन मौतों पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे 'अस्वीकार्य' बताया। बैठक में भारत ने मांग की कि युद्धरत देश नागरिक जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद करें। भारत के इस रुख को 60 देशों का समर्थन मिला है, जिन्होंने एक सुर में होर्मुज को "बिना शर्त" और "तत्काल" खोलने की वकालत की है।

​होर्मुज की घेराबंदी और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट 
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की 20% तेल और गैस सप्लाई का रास्ता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगवाता है। बैठक में भारत ने चिंता जताई कि होर्मुज बंद होने से न केवल तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, बल्कि गैस (LPG/LNG) की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।

हालांकि, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत लगातार ईरान और अन्य संबंधित देशों के संपर्क में है।

इस कूटनीतिक पहुंच का ही नतीजा है कि पिछले कुछ दिनों में 6 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करने में सफल रहे हैं। भारत अब UN में उस प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है जो होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए 'रक्षात्मक बल' के उपयोग की बात करता है।

​कूटनीति और बातचीत ही एकमात्र रास्ता: भारत का शांति संदेश 
तल्ख तेवरों के बावजूद, भारत ने एक बार फिर दोहराया कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। विदेश सचिव ने 60 देशों के सामने 'डीएस्केलेशन' और 'डिप्लोमेसी' पर लौटने का आह्वान किया।

भारत ने कहा कि वह ईरान और इजराइल दोनों के साथ अपने पुराने संबंधों का उपयोग कर तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।

भारत की इस 'बैलेंसिंग एक्ट' की तारीफ बैठक में मौजूद कई देशों ने की। अब सबकी नजरें संयुक्त राष्ट्र में होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं, जहा भारत बहरीन द्वारा लाए गए प्रस्ताव का सह-प्रायोजक है, ताकि समुद्री व्यापार को फिर से बहाल किया जा सके।