Donald trump warns china: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चीन को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर चीन ने ईरान को हथियारों की सप्लाई करने की कोशिश की, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
व्हाइट हाउस के बाहर मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "अगर चीन ऐसा करता है, तो उसके लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी होने वाली हैं।"
चीनी एयर डिफेंस सिस्टम की चर्चा
हाल ही में एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चीन अगले कुछ हफ्तों में ईरान को नया एयर डिफेंस सिस्टम भेजने की तैयारी में है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपनी इस खेप को 'थर्ड कंट्री' यानी किसी तीसरे देश के जरिए भेजने की फिराक में है ताकि उसकी असल पहचान छिपाई जा सके। माना जा रहा है कि इन हथियारों में 'MANPADS' (कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइलें) शामिल हैं, जो अमेरिकी विमानों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
#WATCH | On reports of China shipping weapons to Iran, US President Donald Trump says, "If China does that, China is going to have big problems."
— ANI (@ANI) April 12, 2026
(Source: US Network Pool Via Reuters) pic.twitter.com/YiSlLe3TI6
चीन ने आरोपों को बताया आधारहीन
दूसरी ओर, चीन ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि वे किसी भी संघर्षरत पक्ष को हथियार उपलब्ध नहीं कराते। चीन ने अमेरिका को नसीहत देते हुए कहा कि उसे बिना किसी आधार के आरोप लगाना और सनसनी फैलाना बंद करना चाहिए। चीन का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है और तनाव कम करने की दिशा में काम कर रहा है।
इस्लामाबाद में वार्ता रही विफल
ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही बातचीत बेनतीजा रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार सुबह एक ब्रीफिंग में जानकारी दी कि वार्ता विफल हो गई है। वेंस ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सामने एक बेहद सरल और अंतिम प्रस्ताव रखा था। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का ठोस और स्थायी संकल्प ले, लेकिन फिलहाल ईरान की ओर से ऐसी कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई दी है।
ईरान की सैन्य क्षमताओं पर दबाव
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के पुराने परमाणु संवर्धन केंद्रों को पहले ही नष्ट किया जा चुका है। हालांकि, अमेरिका अब दीर्घकालिक सुरक्षा की गारंटी चाहता है। उनका कहना है कि सवाल सिर्फ आज या अगले दो साल का नहीं है, बल्कि भविष्य का है। अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह से परमाणु हथियारों की होड़ से बाहर हो जाए, जिस पर सहमति नहीं बन पाई है।










