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China NPC news conference: चीन ने सोमवार को अपनी ही 30 साल पुरानी परंपरा तोड़ने का ऐलान किया। चीनी संसद  नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) के प्रवक्ता लू क्विंजियन ने कहा कि प्रधानमंत्री (प्रीमियर) ली कियांग संसद सत्र पूरा होने पर पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगे।

China NPC news conference:चीन ने सोमवार को इंटरनेशनल मीडिया से बचने की कोशिश करते हुए एक अहम ऐलान किया। चीन ने अपनी ही 30 सालों की पुरानी परंपरा खत्म करने की घोषणा की है। चीन की पार्लियामेंट नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के प्रवक्ता लू क्विंजियन ने कहा कि प्रधानमंत्री (प्रीमियर) ली कियांग संसदीय सत्र पूरा होने पर पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगे। बीते 30 साल से यह चीन की परंपरा रही है कि हर प्रधानमंत्री दो साल में एक बार होने वाले संसद सत्र के पूरा हाेने के बाद मीडिया के सवालों का जवाब देते रहे हैं। यह परंपरा चीन में 1988 में शुरू हुई थी। 

कठिन सवालों से बचने की कोशिश
लू क्विंजियन ने कहा है कि जब तक असाधारण परिस्थितियां उत्पन्न नहीं होतीं, तब तक यह परंपरा मौजूदा नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के बाकी बचे कार्यकाल के लिए बंद की जा रही है। इस परंपरा के टूटने से चीन की पारदर्शिता और सरकारी नीति निर्धारण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विश्लेषकों का मानना है है कि चीन की आर्थिक मंदी और जनसांख्यिकीय चुनौतियों से संबंधित कठिन सवालों से बचने के लिए प्रधानमंत्री ली ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने का फैसला लिया है। 

चीन कर रहा ट्रांसपेरेंसी कम करने की कोशिश
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में राजनीति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर जा इयान चोंग का मानना है कि इस तरह से चीन ट्रांसपेरेंसी कम करने की कोशिश कर रहा है। ऐसा होने पर चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी को जानकारी को बेहतर ढंग से कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इससे लोग सरकार की नीतियों को लेकर अटकलें लगाना शुरू करेंगे और निवेशकों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।

चीन की नीतियों को जानने का इकलौता मौका
एनपीसी का सत्र समाप्त होने पर चीनी नेताओं को स्थानीय और इंटरनेशनल मीडिया दोनों के सवालों को जवाब देना होता था। हालांकि इस कॉन्फ्रेस को अक्सर कड़ाई से मॉनिटर किया जाता है। इसके बावजूद भी इस तरह के प्रेस कॉन्फ्रेंस से नेताओं को नीतियां और उनकी कूटनीतिक प्राथमिकताओं के बारे में जानने का प्लेटफॉर्म मिल जाता है। इससे पता चल जाता था कि अगले सत्र में चीन सरकार किन योजनाओं पर काम करेगी। इस दौरान पूछे जाने वाले सवालों को लेकर नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया पहले से ही तैयारियों में जुटी रहती थी।

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