प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के लाहुरपार का रहने वाला सुमित कुमार वर्तमान में डिब्रूगढ़ के चबुआ एयरफोर्स स्टेशन में एमटीएस के पद पर तैनात था। एक जिम्मेदार पद पर होते हुए भी सुमित ने रुपयों के लालच में आकर देश के साथ गद्दारी की।
राजस्थान इंटेलिजेंस और एयरफोर्स इंटेलिजेंस नई दिल्ली की संयुक्त कार्रवाई में यह खुलासा हुआ कि सुमित साल 2023 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के संपर्क में था और लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से गोपनीय डेटा सीमा पार भेज रहा था।
पाकिस्तानी हैंडलर्स की डिमांड और सुमित की गद्दारी
एडीजी प्रफुल्ल कुमार के अनुसार, सुमित कुमार सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा जारी किए गए फर्जी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था। जांच में सामने आया है कि सुमित ने केवल सूचनाएं ही साझा नहीं कीं, बल्कि इसके बदले उसने पाकिस्तानी एजेंटों से अपने बैंक खाते में मोटी रकम भी ट्रांसफर करवाई थी।
पाकिस्तानी जासूसों ने सुमित से मुख्य रूप से इन जानकारियों की मांग की थी:
लड़ाकू विमानों की लोकेशन: चबुआ एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात सुखोई जैसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों की आवाजाही और उनकी स्थिति।
मिसाइल और डिफेंस सिस्टम: बेस पर तैनात मिसाइल यूनिट्स और सुरक्षा के अन्य गोपनीय इंतजाम।
अधिकारियों की डिटेल: एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात उच्चाधिकारियों के नाम, उनकी प्रोफाइल और उनके मूवमेंट की जानकारी।
कैसे हुआ खुलासा? जैसलमेर के झबराराम से जुड़े जासूसी के तार
इस पूरे नेटवर्क की शुरुआत जनवरी 2026 में जैसलमेर निवासी झबराराम की गिरफ्तारी से हुई थी। झबराराम से जब सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी पूछताछ की, तब उसने प्रयागराज के सुमित कुमार के नाम का खुलासा किया।
झबराराम ने बताया था कि सुमित लगातार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के सीधे संपर्क में है। इसके बाद सुमित को रडार पर लिया गया और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसे असम से हिरासत में लिया गया। उसे जयपुर लाकर विभिन्न एजेंसियों द्वारा पूछताछ की गई, जहाँ उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
आगरा के लांस नायक आदर्श कुमार का कनेक्शन: जासूसी का बढ़ता जाल
जासूसी का यह मामला केवल सुमित तक सीमित नहीं है। इससे पहले यूपी एटीएस ने 10 मार्च को आगरा के चीतपुर गांव के रहने वाले आदर्श कुमार उर्फ लकी को भी इसी आरोप में गिरफ्तार किया था।
आदर्श भारतीय नौसेना में लांस नायक के पद पर तैनात था और वह भी आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था। उसने देश के युद्धपोतों की तस्वीरें और लोकेशन आईएसआई एजेंट को भेजी थीं। इन लगातार हो रही गिरफ्तारियों ने यह साफ कर दिया है कि दुश्मन देश अब सेना के निचले स्तर के कर्मचारियों को सोशल मीडिया और रुपयों के लालच के जरिए निशाना बना रहा है।
सोशल मीडिया पर सावधानी: एक्सपर्ट्स की राय और सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध या शांति के समय हर छोटी जानकारी दुश्मन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। जासूस सीमावर्ती क्षेत्रों के सैन्य स्ट्रक्चर, मोबाइल टावर की लोकेशन, अंडरब्रिज, और सेना की फेंसिंग तक की फोटो शेयर करते हैं। सुमित कुमार भी इसी तरह स्कूल, हॉस्टल और एडमिन बिल्डिंग की लोकेशन पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को साझा कर रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों ने अब सेना और वायुसेना के अन्य कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया प्रोटोकॉल को और भी कड़ा कर दिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की सेंधमारी को रोका जा सके।










