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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर हज और उमराह यात्रा पर दिखने लगा है। भोपाल सहित कई शहरों में 30% तक बुकिंग रद्द हुईं, यात्रियों के लाखों रुपए ट्रैवल एजेंसियों में फंसे।

भोपाल। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर उमराह यात्रा पर पड़ने लगा है। इसकी वजह से भोपाल समेत कई शहरों के यात्रियों की योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। ट्रैवल ऑपरेटरों के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए लोग उमराह के लिए यात्रा करने से हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं वे विदेश में फंस न जाएं। इसी वजह से करीब 30 प्रतिशत तक यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द करवा दी है, जबकि कई अन्य अभी भी अपनी यात्रा को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा है, जिन्होंने रमजान के दौरान हज और उमराह के लिए पहले से योजना बनाई थी। 

रमजान में उमराह का विशेष महत्व
रमजान के महीने में उमराह का विशेष धार्मिक महत्व होता है, इसलिए बड़ी संख्या में लोग इस समय यात्रा करना पसंद करते हैं। लेकिन मौजूदा अस्थिरता के कारण कई यात्रियों ने अपनी यात्रा रद्द या स्थगित कर दी है। वहीं, जिन लोगों ने पहले ही ट्रैवल एजेंसियों को बड़ी रकम का भुगतान कर दिया था, उनका पैसा अब फंसा हुआ है और वे रिफंड का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि फ्लाइट्स रद्द या प्रभावित हो चुकी हैं। भोपाल के शाहजहानाबाद की रहने वाल आफताब का मामला इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। आफताब का सपना था कि वह अपने ऑटो-रिक्शा चालक पिता के साथ रमजान के पवित्र महीने में उमराह करें। 

कई माह मेहनत कर पैसे जमा किए
अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उनके परिवार ने कई महीनों तक मेहनत से पैसे जमा किए और लगभग 4 लाख रुपए इकट्ठा कर ट्रैवल एजेंसी को भुगतान कर दिया। उन्होंने पहले से फ्लाइट टिकट भी बुक कर लिए थे, लेकिन बाद में वे टिकट रद्द हो गए। इससे उनका सपना अधूरा रह गया और उनकी जमा की हुई रकम भी फंस गई। आफताब की यात्रा रमजान के अंतिम अशरा में निर्धारित थी, जिसे उमराह के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसी तरह कई अन्य यात्रियों की स्थिति भी है, जिनका पैसा ट्रैवल एजेंसियों के पास अटका हुआ है। 

अब यात्रियों को रिफंड में हो रही परेशानी
ट्रैवल ऑपरेटर निहाल मंसूरी के अनुसार, पहले फ्लाइट्स अस्थायी रूप से बंद होने के कारण सऊदी अरब में की गई बुकिंग्स का भुगतान पहले ही कर दिया गया था, जिससे अब यात्रियों को रिफंड मिलने में दिक्कत हो रही है। निहाल मंसूरी ने बताया कि उमराह यात्रा में इस समय भारी गिरावट आई है। उनकी एजेंसी हर साल लगभग 6,000 से 7,000 यात्रियों को भेजती थी, लेकिन इस साल मौजूदा हालात के कारण यह संख्या काफी कम होने की संभावना है। कुल मिलाकर, इस संघर्ष ने न केवल धार्मिक यात्राओं को प्रभावित किया है, बल्कि लोगों की भावनाओं और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डाला है।

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