खरगोन/महेश्वर। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा के मामले ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। मोनालिसा का विवाह अब जांच के दायरे में आ गया है। ताजा खुलासे में सामने आया है कि जिस मोनालिसा को बालिग बताया जा रहा था, वह वास्तव में नाबालिग है। इसके बाद पूरे मामले ने नया रूप ले लिया है और पुलिस ने उसके पति यूपी के बागपत के फरमान के खिलाफ सख्त धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों के हस्तक्षेप के बाद पुलिस की सक्रियता भी बढ़ गई है।
अस्पताल के रिकॉर्ड से उम्र का खुलासा
युवती की उम्र को लेकर चल रहे विवाद पर अब आधिकारिक दस्तावेज सामने आ गए हैं। महेश्वर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पुराने रजिस्टर में उसका जन्म दर्ज मिला है। इस रिकॉर्ड के अनुसार जन्म तिथि 30 दिसंबर 2009 बताई गई है। इस आधार पर स्पष्ट हुआ कि वह अभी वयस्क नहीं है।
इस खुलासे के बाद पहले जारी किए गए दस्तावेजों पर भी सवाल उठे हैं। नगर परिषद द्वारा जारी आयु प्रमाण पत्र को अब अमान्य घोषित कर दिया गया है।
फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने की पुष्टि
जांच में यह भी सामने आया कि नगर परिषद से गलत तरीके से प्रमाण पत्र बनवाया गया था। बताया गया कि एक हलफनामे के आधार पर युवती को बालिग दर्शाया गया। सीएमओ ने भी स्वीकार किया कि दस्तावेज सही जांच के बिना जारी हुआ था। अब संबंधित प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया है।
इस लापरवाही के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पूरे मामले में जिम्मेदारों की भूमिका की जांच की जा रही है।
परिजनों ने की बेटी को वापस लाने की मांग
युवती के माता-पिता ने मीडिया के सामने अपनी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत जानकारी और कागजों के आधार पर शादी कराई गई। परिजनों ने प्रशासन से बेटी को सुरक्षित वापस लाने की अपील की है। उन्होंने पहले ही पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। अब मामले के तूल पकड़ने के बाद जांच तेज कर दी गई है।
राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। स्थानीय विधायक ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे युवती को फंसाया गया। साथ ही कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी की गई है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों को जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच एजेंसियां सक्रिय, शुरू की पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। मध्य प्रदेश और केरल पुलिस मिलकर जांच कर रही हैं। आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में केस दर्ज होने से स्थिति गंभीर हो गई है। आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल यह मामला सामाजिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा में बना हुआ है।










