भोपाल। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने अपने कामकाज को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए एक बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। संगठन ने तय किया है कि मार्च 2027 से देशभर में लागू प्रांत व्यवस्था को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर एक नई डिवीजन-आधारित संरचना लागू की जाएगी, जिससे कार्यों का बेहतर समन्वय और संचालन संभव हो सके। इस बदलाव के तहत पूरे भारत को लगभग 85 डिवीजनों में बांटा जाएगा। यह व्यवस्था संगठन के विकेंद्रीकरण की दिशा में उठाया गया कदम मानी जा रही है।
गतिविधियों का विस्तार और जनसंपर्क
मध्य प्रदेश में भी इस नई प्रणाली के तहत सात प्रमुख डिवीजन बनाए जाएंगे, जिनमें ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और रीवा जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इसके अलावा क्षेत्र स्तर की इकाइयों का भी गठन किया जाएगा, जिससे संगठन की पहुंच और मजबूत हो सके। आरएसएस के पदाधिकारियों के अनुसार, संगठन की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, खासकर मध्य भारत क्षेत्र में। शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में शाखाओं की संख्या में वृद्धि हुई है।
सामाजिक कार्यक्रमों पर बढ़ेगा जोर
संगठन अब सद्भाव सम्मेलन और युवा संवाद जैसे कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने की योजना बना रहा है। इससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने और युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। पहले आयोजित अभियानों जैसे घर-घर संपर्क और विभिन्न सम्मेलनों की सफलता से संगठन को प्रोत्साहन मिला है। हाल के अभियानों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली है।
विकेंद्रीकरण से बढ़ेगी कार्यक्षमता
लाखों परिवारों तक संपर्क किया गया और उन्हें सामाजिक व राष्ट्रीय गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया। प्रांत व्यवस्था को समाप्त कर नई डिवीजन प्रणाली लागू करने का मुख्य उद्देश्य संगठन को अधिक लचीला और प्रभावी बनाना है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और स्थानीय स्तर पर काम करने में आसानी होगी। बदलाव आने वाले समय में आरएसएस के विस्तार और कार्यप्रणाली को नई दिशा दे सकता है।








