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भोपाल में बढ़ते अपराध और गैंग एक्टिविटी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में 10 से ज्यादा गैंग सक्रिय हैं और 1000 से अधिक अपराधी पुलिस की निगरानी में हैं। बावजूद इसके, हत्या, लूट और हमले जैसी घटनाएं जारी हैं।

भोपाल। प्रदेश की राजधानी में हाल ही में हुई फायरिंग की घटना ने शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बदमाशों के बीच आपसी रंजिश के चलते गैंगवार की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता में डर का माहौल बन रहा है। यह संकेत है कि शहर में सक्रिय आपराधिक गिरोह पहले से ज्यादा संगठित और निडर होते जा रहे हैं।

अपराधी जेल से आकर करते हैं अपराध  
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, शहर में सैकड़ों गुंडे और हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं, जबकि 1000 से अधिक संदिग्ध अपराधी लगातार निगरानी में रखे गए हैं। इसके अलावा, 10 से ज्यादा संगठित गैंग अलग-अलग इलाकों में सक्रिय हैं, जो विभिन्न प्रकार की आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि कई अपराधी जेल से जमानत या सजा पूरी करने के बाद बाहर आते ही दोबारा अपराध में शामिल हो जाते हैं।

पुलिस ने निगरानी के लिए बनाई टीमें

हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अपराधियों ने कानून और व्यवस्था को सीधी चुनौती दी है। इसके बाद से पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पुलिस द्वारा हिस्ट्रीशीटर और आदतन अपराधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं, फिर भी हत्या, लूट, चोरी और हमले जैसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। इससे यह साफ होता है कि मौजूदा निगरानी प्रणाली अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है।

शहर में 10 से ज्यादा गिरोह सक्रिय  
भोपाल में 10 से ज्यादा गिरोह सक्रिय हैं, जिनमें कुछ के सरगना जेल में होने के बावजूद उनके नेटवर्क काम कर रहे हैं। ये गैंग वसूली, हत्या, ड्रग्स तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त हैं। अलग-अलग इलाकों में इनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है और इनके सदस्य बड़ी संख्या में सक्रिय हैं। पुलिस ने इन हालातों को देखते हुए निगरानी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू किए हैं।

पुलिस की सक्रियता से लगेगी लगाम

संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस की टीमें नजर रख रही हैं। और अपराधियों का नियमित सत्यापन किया जा रहा है। इसके बावजूद सूबे की राजधानी में अपराधोों पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा सका है। कानून-व्यवस्था के लिहाज से स्थितियां ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। इससे साफ हो जाता है कि अपराध पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए पुलिस प्रशासन को और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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