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हरियाणा के पानीपत में 13–15 मार्च तक RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक आयोजित हो रही है। इसमें संघ के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव जैसे प्रांत व्यवस्था खत्म कर राज्य प्रचारक और संभाग प्रचारक प्रणाली लागू करने पर फैसला हो सकता है।

भोपाल। हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा क्षेत्र में आज से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा शुरू हो रही है। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक में संगठन के भविष्य और संरचना से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार इस बार संघ के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। यह बैठक 13 से 15 मार्च तक चलेगी और इसमें देशभर से वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

अब राज्य प्रचारक नियुक्त करने का विचार
सूत्रों के अनुसार संघ अपने कार्य ढांचे को अधिक सरल और प्रभावी बनाने का प्रयास कर रहा है। अभी तक संगठन की व्यवस्था में प्रांत एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है। बड़े राज्यों को कई प्रांतों में बांटकर प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग प्रांत प्रचारक नियुक्त किए जाते थे। इनका काम स्थानीय कार्यकर्ताओं और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय स्थापित करना होता था। अब इस व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव है। नई योजना के तहत प्रांत स्तर की प्रणाली को समाप्त कर सीधे राज्य प्रचारक नियुक्त करने का विचार किया जा रहा है। 

मुख्य प्रचारक के पास होगी राज्य की कमान
इसका मतलब यह होगा कि पूरे राज्य के संगठनात्मक कामकाज की जिम्मेदारी एक ही मुख्य प्रचारक के पास होगी। इससे निर्णय प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही संगठन के ढांचे में एक नई इकाई जोड़ने की भी चर्चा है, जिसे संभाग प्रचारक कहा जाएगा। संभाग आमतौर पर प्रशासनिक रूप से कमिश्नरी या मंडल स्तर की इकाई को माना जाता है। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक संभाग के लिए एक प्रचारक होगा, जो राज्य स्तर के नेतृत्व और जिलों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाए रखेगा। 

संगठन के शीर्ष स्तर पर भी बदलाव संभव
इस तरह नया ढांचा क्षेत्र प्रचारक, राज्य प्रचारक, संभाग प्रचारक और उसके बाद जिला, तहसील, ब्लॉक और गांव स्तर के कार्यकर्ताओं के रूप में विकसित हो सकता है। संगठन के शीर्ष स्तर पर भी कुछ बदलाव संभव हैं। अभी देशभर में करीब 11 क्षेत्रीय इकाइयां हैं, जिन्हें क्षेत्र कहा जाता है और इनके लिए अलग-अलग क्षेत्र प्रचारक नियुक्त होते हैं। प्रस्ताव है कि इन क्षेत्रों की संख्या घटाकर लगभग नौ कर दी जाए। इससे शीर्ष पदों की संख्या थोड़ी कम होगी, लेकिन निचले स्तर पर जिम्मेदारियां बढ़ाई जा सकती हैं।

जमीनी स्तर पर मजबूती बढ़ाने की योजना
संघ के भीतर इस बदलाव को जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अभी कई बार स्थानीय कार्यकर्ताओं को निर्णय लेने के लिए प्रांत स्तर तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन यदि संभाग स्तर पर जिम्मेदार पदाधिकारी होंगे तो कार्यकर्ताओं को सीधे मार्गदर्शन मिल सकेगा और कार्यक्रमों को तेजी से लागू किया जा सकेगा। संगठन के भीतर यह भी विचार चल रहा है कि जिला स्तर पर नियमित प्रचारकों की नियुक्ति की जाए या सहायक प्रचारक जैसी नई जिम्मेदारियां तय की जाएं।  

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