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World Hunger Day: वर्ल्ड हंगर-डे 28 मई को मनाया जाता है। इस दिन से दुनिया के परिचित है। भारत में भूखे लोगों को मुफ्त में खाना खिलाने का काम कई सहयोगी संस्थाओं द्वारा भी किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में जरूरतमंदों को मुफ्त खाना वितरण करने का कार्य हर रोज किया जा रहा है।

World Hunger Day Bhopal: वर्ल्ड हंगर-डे 28 मई को मनाया जाता है और इस दिवस से दुनिया के परिचित है। भारत में भूखे लोगों को मुफ्त में खाना खिलाने का काम कई सहयोगी संस्थाओं द्वारा भी किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में जरूरतमंदों को मुफ्त खाना वितरण करने का कार्य हर रोज किया जा रहा है।

मानवता की मिसाल कायम
यह संस्थाएं मानवता की मिसाल कायम रखते हुए बिना भेदभाव के जरूरतमंद लोगों का पेट हर रोज भरने का काम करती हैं। वर्तमान समय में जहां अपने परिवार का ही पेट भरने के लिए ज्यादातर व्यक्ति दिन रात मेहनत करते हुए रुपए कमाने की जुगत करते हैं, तो वहीं बिना स्वार्थ के लोगों की मदद के लिए खड़े रहने वालों की भी कमी नहीं है।

ईश्वर संपन्नता देता है
एक कहावत यह भी प्रचलित है कि दुनिया में किसी की तारीफ करने की जगह उसे खाना खिला दोगे तो ईश्वर आपको भी संपन्नता देता है। राजधानी में भूखे लोगों को खाना खिलाने का जिम्मा कई संस्थाओं ने उठाया है। शहर में कोई भूखा तो आ जाए लेकिन उसे सही जानकारी मिल जाए तो वह वापस भूखा नहीं जाएगा। इसका उदाहरण पेश कर रहे हैं भोपाल के समाजसेवक।

जिम्मा कई संस्थाओं ने उठाया है
भोपाल शहर की बात की जाए तो यहां पर लोगों को मुफ्त में खाना खिलाने का जिम्मा कई संस्थाओं ने उठाया है और हर रोज हजारों लोगों को खाना वितरित भी किया जा रहा है। वर्ल्ड हंगर डे पर हरिभूमि ने कुछ ऐसे समाजसेसियों से बात की, जो भूखों को खाना खिलाने के काम जुटे हुए हैं।

उत्कर्षणी रसोई: खुशी का एहसास होता है
भोपाल की बिन्दु रमाकांत घाटपांडे जरूरमंदों को भोजन उपलब्ध कराने उत्कर्षणी रसोई चलाती हैं। बताया कि उनकी रसोई में रोजाना 10 किलो आटे की रोटी, 10 किलो चवाल और दाल के साथ 12 किलो का हलवा बनाया जाता है। इसे जेके अस्पताल में आए लोगों को 5 रुपए में उपलब्ध कराते हैं। मरीज व उनके परिजन उन्हें मां कहकर पुकारते हैं। यह सुन कर खुशी का एहसास होता है।

किचन सेवा: वैन में खाना लाकर लोगों को मुफ्त में वितरित किया जा रहा
भोपाल में अरुण मालवीय भूखों को भरपेट भोजन कराने किचन सेवा चला रहे हैं। बताया कि वह अपनी कार से बेसहाराें तक भोजन पहुंचाते हैं। शहर के अलग अलग अस्पतालों और बाजारों के आसपास प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को मुफ्त में भोजन पैकेट वितरित करते हैं। इसके अलावा उनकी संस्था प्रतिदिन जेके अस्पताल में 5 रुपए में जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराती है।  

नादरा बस स्टैंड: मकबूल अहमद 11 साल से करा रहे नि:शुल्क भोजन 
भोपाल के मकबूल अहमद पिछले 11 साल से नादरा बस स्टैंड में गरीब, बेसहारा लोगों का निःशुल्क भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने इसकी शुरुआत 1 मई 2013 को की थी। बताया कि कोरोना के पहले तक वह रोजाना 300-400 लोगों को भोजन कराते थे, लेकिन लॉकडाउन के समय में रोजाना 1500- 2000 खाने के पैकेट वितरित किए। अभी 100 पैकेट रोजाना वितरित करते हैं। कहा, जब तक ईश्वर चाहेगा, मानव सेवा का सिलसिला जारी रहेगा। 

जितना संभव हो, जरूरतमंदों की मदद करें
उत्कर्षणी रसोई की बिन्दु पांडेय ने बातया कि लोगों का पेट भरने का सुख वही जान सकता है, जो इस काम करता है। इसलिए में सबको प्रेरित करती हूं कि जितना संभव हो, जरूरतमंदों की मदद करें। लोगों को भूखा देखकर मुझसे रहा नहीं जाता। इसलिए शुरू में कार से खाना ले जाकर बांटती थी। पांच साल से जेके अस्पताल कोलार में रसोई चला रही हूं। 

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