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मध्यप्रदेश के धार जिले में आयोजित नसबंदी शिविर में अव्यवस्था के आरोप सामने आए हैं। 175 से अधिक महिलाओं के ऑपरेशन, सुविधाओं की कमी और मेडिकल प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मध्यप्रदेश। धार जिले में आयोजित नसबंदी शिविर गलत कारणों से चर्चा में है। यहां 175 से अधिक महिलाओं की नसबंदी की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले तो डॉक्टर लेट आए इसके बाद उन्होंने दो मिनट में एक ओपरेशन कर डाला। इतना ही नहीं नसबंदी के बाद महिलाओं को जमीन पर लेटा दिया गया। अव्यवस्था के चलते महिलाएं धूप में भूखी-प्यासी पड़ी रहीं।

शिवर में बेड की कमी
मामला आदिवासी बहुल क्षेत्र धार के बाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है। यह क्षेत्र गंधवानी विधानसभा में आता है जहां से नेता विपक्ष उमंग सिंघार विधायक हैं। महिलाओं को सुबह आठ बजे शिविर में बुलाया गया था। इन महिलाओं के साथ उनके छोटे बच्चे और परिजन भी थे। सरकारी शिविर में जितनी महिलाएं आईं थी उतने तो बेड भी नहीं थे। रिपोर्ट्स की मानें तो यहां पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं थी।

दोपहर तीन बजे शिविर में आए डॉक्टर
गौरतलब है कि, 175 से अधिक महिलाओं की जिम्मेदारी एक ही डॉक्टर को दे दी गई थी। आठ बजे से आईं महिलाएं भूखी-प्यासी डॉक्टर का इन्तजार करती रहीं और डॉक्टर दोपहर तीन बजे शिविर में आए। इसके बाद डॉक्टर ने जो किया उसे मेडिकली सेफ नहीं माना जा सकता।

दो मिनट में एक महिला की नसबंदी
शिविर में आते ही डॉक्टर ने एक के बाद एक ऑपरेशन करने शुरू कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दो मिनट के अंदर एक महिला की नसबंदी कर दी गई। नसबंदी के बाद महिलाओं को खुले आसमान के नीचे को जमीन पर लेटा दिया गया। धुप में पड़ी महिलाएं गर्मी से परेशान हुईं तो उनके परिजन उन्हें पंखा करते नजर आए। 

कारण बताओ नोटिस जारी
यह भी बताया जा रहा है कि, शिविर की जिम्मेदारी जिस अधिकारी की थी वे मौके पर थे ही नहीं। मीडिया के लोग जब शिविर में आने लगे तो वे पीछे से आए। जिला प्रशासन को जब इस मामले की जानकारी मिली तो कलेक्टर ने CMHO समेत शिविर के जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। CMHO द्वारा बीएमओ को जिला मुख्यालय अटैच करने की बात भी सामने आई है। एक ओर जहां प्रशासन उचित कार्रवाई की बात कह रहा है वहीं दूसरी ओर मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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