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बैठक में चंबल नदी के पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में डॉल्फिन और घड़ियाल जैसे जलीय जीवों की सुरक्षा, 58 विकास प्रस्तावों की समीक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष घटाने पर अहम निर्णय लिए गए।

भोपाल। सूबे की राजधानी भोपाल में शनिवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की स्टैंडिंग कमेटी की 89वीं बैठक का आयोजन किया गया। स्थानीय वन प्रबंधन संस्थान में आयोजित इस अहम बैठक में संरक्षित क्षेत्रों से जुड़े अनेक विकास प्रस्तावों की गहन समीक्षा की गई।

इसी अवसर पर सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) की 44वीं बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें चिड़ियाघरों और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नदियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ विकास कार्यों में संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया। 

संरक्षित क्षेत्रों से जुड़े 58 प्रस्तावों की समीक्षा
बैठक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों, टाइगर रिजर्व और इको-सेंसिटिव जोन में प्रस्तावित विकास परियोजनाओं का परीक्षण करना था। वाइल्ड लाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत आने वाली इन परियोजनाओं का मूल्यांकन कानूनी प्रावधानों, पर्यावरणीय प्रभाव और जैव विविधता पर संभावित असर को ध्यान में रखकर किया गया।

इन 58 प्रस्तावों में संचार नेटवर्क का विस्तार, ऑप्टिकल फाइबर बिछाने, बिजली ट्रांसमिशन लाइनें, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति योजनाएं, थर्मल पावर परियोजनाएं, रक्षा संबंधी कार्य और सिंचाई योजनाएं शामिल थीं। कमेटी ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि विकास कार्यों से वन्यजीव आवास और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को न्यूनतम क्षति पहुंचे।

चंबल में ई-फ्लो बनाए रखने पर विशेष जोर
बैठक में चंबल नदी के पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) को बनाए रखने की जरूरत को प्रमुखता दी गई। नदी का प्राकृतिक जल प्रवाह बना रहना जलीय जीवों के अस्तित्व के लिए अत्यंत जरूरी है। खासतौर पर डॉल्फिन और घड़ियाल जैसे संवेदनशील जीवों के संरक्षण के लिए पर्याप्त जल स्तर और स्वच्छ प्रवाह अनिवार्य माना गया।

यदि नदी का बहाव बाधित होता है, तो इन जीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकता है। बैठक में टाइगर रिजर्व के भीतर बसे गांवों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा की गई। यह माना गया कि संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार भी आवश्यक है। 

संतुलित विकास की दिशा में कदम
इसके अलावा, मानव-तेंदुआ संघर्ष जैसे बढ़ते मामलों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी रणनीति बनाने पर भी विचार हुआ। बैठक में वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच लगातार बढ़ते टकराव को कम करने के लिए जागरूकता, बेहतर निगरानी और त्वरित मुआवजा व्यवस्था जैसे उपायों पर जोर दिया गया।

कुल मिलाकर, यह बैठक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है। सरकार का प्रयास है कि देश में बुनियादी ढांचे का विस्तार हो, लेकिन साथ ही वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे। इस तरह की समीक्षात्मक बैठकों के माध्यम से दीर्घकालिक और टिकाऊ विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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