मप्र विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष ने मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की। सदन में कुछ देर कार्यवाही बाधित रही, लेकिन बाद में दोबारा शुरू हुई।

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। कार्यवाही शुरू होने से पहले ही कांग्रेस विधायकों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए थालियां बजाईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार के बजट को आम जनता के लिए निराशाजनक बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें ठोस प्रावधानों की जगह केवल दिखावटी घोषणाएं हैं। उनका कहना था कि बजट में हर वर्ग के साथ न्याय नहीं हुआ और यह जमीनी हकीकत से दूर है।

भागीरथपुरा मुद्दे पर विपक्ष ने किया हंगामा  
सदन के भीतर सबसे ज्यादा विवाद इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के मुद्दे पर हुआ। विपक्ष ने इस मामले को गंभीर लापरवाही बताते हुए संबंधित मंत्रियों से इस्तीफे की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर चर्चा उचित नहीं है।

उन्होंने कहा इससे अदालत की अवमानना जैसी स्थिति बन सकती है। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने सुझाव दिया इस पर सदन में बहस करने के बजाय संबंधित मंत्री के साथ अलग से बैठक कर चर्चा की जाए। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने भी कहा जब कोई मामला कोर्ट में हो, तो सदन में बहस ठीक नहीं। 

सीएम ने बताया एक आईएएस को निलंबित किया
वहीं, उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सरकार का पक्ष रखते हुए जानकारी दी कि 21 से 29 दिसंबर के बीच डायरिया फैलने की घटनाएं सामने आई थीं। उन्होंने बताया 22 मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है। इस पर विपक्ष ने आपत्ति जताते हुए मृतकों की संख्या 35 बताई और सभी प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की।

साथ ही जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को निलंबित भी किया गया है। 

सीएम के स्पष्टीकरण पर भी चुप नहीं हुए कांग्रेसी
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि राहत और नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाए गए थे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा किए गए राहत कार्यों का भी जिक्र किया गया। इसके बावजूद विपक्ष की नाराजगी कम नहीं हुई और इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार शोर-शराबा जारी रहा। स्थिति

ऐसी बनी कि कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित हुई, हालांकि करीब पांच मिनट बाद सदन दोबारा संचालित किया गया। सत्र के पिछले दिनों पर नजर डालें तो शुरुआत से ही माहौल गरम रहा है। बजट सत्र 6 मार्च तक चलेगा। इसमें हजारों प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य संसदीय कार्य सूचीबद्ध हैं।