जबलपुर। मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल (एसबीसी) की नई 25 सदस्यीय कार्यकारिणी के चुनाव से पहले चुनाव अधिकारी की नियुक्ति को लेकर स्थिति पेचीदा हो गई है। अलग-अलग स्तर पर जारी आदेशों ने वकील समुदाय के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी। हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि पूरी चुनाव प्रक्रिया जस्टिस एस.के. पालो की देखरेख में ही आगे बढ़ेगी। दरअसल, दो अलग-अलग आदेशों के चलते भ्रम की स्थिति बन गई थी। पहले, बार काउन्सिल चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 16 फरवरी 2026 को एक हाई पावर इलेक्शन कमेटी गठित की थी। फिर बार काउन्सिल ऑफ इंडिया ने एक अलग आदेश जारी कर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी।
सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी
16 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने रिटायर्ड जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की अध्यक्षता में एक हाई पावर इलेक्शन कमेटी का गठन किया था। इस समिति में रिटायर्ड जस्टिस के.के. त्रिवेदी और वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ को भी शामिल किया गया। उद्देश्य था कि राज्य बार काउंसिल के चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराए जाएं।
बीसीआई के आदेश से बढ़ा विवाद
इसके कुछ ही दिन बाद, 21 फरवरी 2026 को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने अलग आदेश जारी कर रिटायर्ड जस्टिस एन.के. मोदी को चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिया। इतना ही नहीं, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा भी कर दी गई। यहीं से उलझन शुरू हुई, क्योंकि दो अलग-अलग संस्थाओं द्वारा समानांतर नियुक्तियां होने से यह स्पष्ट नहीं था कि चुनाव की जिम्मेदारी आखिर किसके पास होगी।
स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश
जब जस्टिस दिवाकर की अगुवाई वाली कमेटी ने स्टेट बार काउंसिल में पदभार संभालना चाहा, तब समानांतर नियुक्ति का मुद्दा खुलकर सामने आया। बाद में जस्टिस धूलिया की समिति ने विचार-विमर्श के बाद संकेत दिया कि चुनाव प्रक्रिया जस्टिस एस.के. पालो की निगरानी में ही आगे बढ़ेगी। अब एसबीसी ने पूरी स्थिति स्पष्ट करने के लिए बीसीआई से औपचारिक मार्गदर्शन मांगा है, ताकि भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद खड़ा न हो।
अब आगे क्या?
फिलहाल यह माना जा रहा है कि चुनाव की प्रक्रिया जस्टिस एस.के. पालो के पर्यवेक्षण में होगी, लेकिन अंतिम स्थिति बीसीआई के आधिकारिक जवाब के बाद ही साफ होगी। कुल मिलाकर, चुनाव अधिकारी की नियुक्ति को लेकर उत्पन्न भ्रम ने वकील समुदाय में चर्चा का माहौल बना दिया है। अब सभी की नजर बीसीआई के अगले कदम पर टिकी है, जिससे पूरी प्रक्रिया को औपचारिक रूप से स्पष्ट किया जा सके।









