भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित जयप्रकाश जिला चिकित्सालय (जेपी अस्पताल) बुधवार को उस समय आंदोलन का केंद्र बन गया, जब प्रदेशभर से आए संविदा स्वास्थ्यकर्मी बड़ी संख्या में यहां एकत्र हुए। लगभग तीन हजार कर्मचारियों ने स्थायी नियुक्ति और लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि वे कई सालों से अनुबंध पर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें नियमित नहीं किया गया। उनका आरोप है कि अस्थायी व्यवस्था के कारण उनका भविष्य असुरक्षित बना हुआ है और उन्हें सामाजिक सुरक्षा लाभ भी पूरी तरह नहीं मिल पा रहे हैं।
स्वास्थ्य संचालनालय की ओर मार्च, पुलिस ने रोका
धरने के बाद प्रदर्शनकारी मध्यप्रदेश स्वास्थ्य संचालनालय की ओर कूच करने लगे। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था। जब कुछ कर्मचारी मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान हल्की धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। अफरा-तफरी की स्थिति में कुछ लोग गिर पड़े, हालांकि बाद में हालात काबू में आ गए।
महिला कर्मचारी की तबीयत बिगड़ी
प्रदर्शन के बीच एक महिला स्वास्थ्यकर्मी अचानक बेहोश हो गईं। वे अपने छोटे बच्चे के साथ धरने में शामिल हुई थीं। साथी कर्मचारियों ने तुरंत बच्चे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और महिला को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। इस घटना से कुछ समय के लिए माहौल भावुक हो उठा। हड़ताल का असर केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा। कई जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य इकाइयों में नियमित सेवाएं प्रभावित हुईं। मरीजों को जांच और परामर्श सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ा।
प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आवश्यक सेवाएं बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई, लेकिन कर्मचारी अनुपस्थिति का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इस आंदोलन में एड्स नियंत्रण कर्मचारी संघ, डेंगू-मलेरिया कर्मचारी संगठन, हेल्थ ऑफिसर्स फेडरेशन, आउटसोर्स हेल्थ वर्कर्स यूनियन और नर्सिंग अधिकारियों के संगठन सहित कई मंचों ने भाग लिया। सभी का कहना है कि सरकार को उनकी नौ सूत्रीय मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
आगे आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि महामारी और आपातकालीन परिस्थितियों में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर सेवाएं दीं, फिर भी उन्हें समान वेतन और स्थायित्व जैसे अधिकार नहीं मिले। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल वेतन या पद की नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की भी है। कुल मिलाकर, जेपी अस्पताल में हुआ यह प्रदर्शन प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में कार्यरत संविदा कर्मियों की बढ़ती असंतुष्टि को दर्शाता है। अब नजरें सरकार के अगले कदम पर टिक गई हैं।









