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इंदौर के भागीरथपुरा में 58 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद दूषित पानी को लेकर विवाद गहरा गया है। परिवार ने खराब पानी को कारण बताया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने लिवर सिरोसिस को मृत्यु की वजह बताया। क्षेत्र में पहले से जल प्रदूषण के आरोपों के चलते लोगों में चिंता और अविश्वास का माहौल बना हुआ है।

 इंदौर। भागीरथपुरा इलाके में एक और मौत ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। 58 वर्षीय रामनरेश यादव के निधन के बाद उनके परिवार ने दावा किया है कि क्षेत्र में सप्लाई हो रहे दूषित पानी की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ी और अंततः उनकी जान चली गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इस आरोप से सहमत नहीं है और उसने मौत का कारण पुरानी बीमारी बताया है। परिजनों के अनुसार, जनवरी की शुरुआत में उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी।

 स्वास्थ्य शिविर में उनका प्राथमिक उपचार कराया गया। दवाइयां लेने के बाद भी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। बाद में हालत गंभीर होने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आईसीयू में इलाज चला। परिवार का कहना है कि उनके पैरों में सूजन बढ़ती जा रही थी और शरीर में पानी भरने की समस्या भी सामने आई। आखिरकार इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। परिजनों ने कहा उनकी मौत दूषित पानी से हुई है।

दूसरी ओर, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मरीज पहले से लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। इस रोग में शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है और श्वास संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं। अस्पताल प्रशासन ने भी पुष्टि की है कि मृत्यु का कारण लिवर से जुड़ी जटिलताएं थीं, न कि जलजनित संक्रमण। भागीरथपुरा में पहले से कथित दूषित जल की घटनाओं के कारण माहौल संवेदनशील बना हुआ है। 

अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे हर नई घटना पर संदेह गहरा जाता है। एक तरफ परिवार पानी को जिम्मेदार मान रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासन चिकित्सकीय रिपोर्ट का हवाला दे इसे लीवर सिरोसिस से हुई मौत बता रहा है। ऐसे में स्पष्ट निष्कर्ष के लिए विस्तृत जांच और पारदर्शी रिपोर्ट जरूरी मानी जा रही है, ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके और लोगों में फैली आशंकाएं दूर हों। 

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