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मध्यप्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होते ही 55 जिलों में शराब दुकानों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू। जानिए कैसे 20% बढ़ी रिजर्व प्राइस और क्या बदला इस बार की नीति में।

भोपाल। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले चरण में प्रदेश के 55 जिलों में 330 समूहों की लगभग 1,200 शराब दुकानों के लिए ई-टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इन दुकानों की कुल आरक्षित कीमत 6,322.23 करोड़ रुपए तय की गई है। राजधानी भोपाल में भी 7 समूहों की 29 दुकानें इस चरण में शामिल हैं। इच्छुक आवेदक 2 मार्च तक अपने टेंडर जमा कर सकेंगे, जबकि उसी दिन शाम 6 बजे के बाद निविदाएं खोली जाएंगी।

19 हजार करोड़ से अधिक राजस्व की आशा
सरकार का अनुमान है कि नई नीति के जरिए 19 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हो सकता है। पूरे प्रदेश में कुल 55 जिलों के 926 समूहों की 3,553 दुकानों के लिए 18,591.37 करोड़ की रिजर्व प्राइस निर्धारित की गई है। इस बार सरकार ने आरक्षित मूल्य में पिछले साल की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। सरकार शराब बिक्री से आय बढ़ाने की दिशा में गंभीर है।

पुराने ठेकेदारों को सीधा नवीनीकरण नहीं
नई नीति में एक बड़ा बदलाव यह किया गया है कि मौजूदा ठेकेदारों को सीधे नवीनीकरण की सुविधा समाप्त कर दी गई है। इसका मतलब यह हुआ कि अब सभी इच्छुक व्यापारियों को खुली प्रतिस्पर्धा के तहत टेंडर प्रक्रिया में भाग लेना अनिवार्य होगा। इससे शराब दुकानों के बंटवारे में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

प्रदेश में मोनोपॉली खत्म करने का प्रयास
सरकार ने बड़े ठेकेदारों की पकड़ कमजोर करने के उद्देश्य से दुकानों को 5-5 के समूह में बांट दिया है। इससे किसी एक कारोबारी के पास अधिक दुकानों का नियंत्रण नहीं रहेगा और छोटे व्यवसायियों को भी अवसर मिलेगा। रिजर्व प्राइस के मामले में जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, इंदौर और भोपाल शीर्ष पर हैं। इन जिलों में शराब दुकानों की कीमतें अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक रखी गई हैं, जो वहां की मांग और बाजार क्षमता को दर्शाती हैं।

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