मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सीधी जिले के रामपुर नैकिन जनपद पंचायत के एक निर्वाचित सदस्य का चुनाव रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि उम्मीदवार ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और शैक्षणिक जानकारी को सही तरीके से घोषित नहीं किया था।

जबलपुर। मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने चुनाव के दौरान आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने को गंभीर मानते हुए सीधी जिले के एक जनपद सदस्य का चुनाव निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उस पद के लिए दोबारा चुनाव कराने का निर्देश दिया है। यह मामला सीधी जिले की रामपुर नैकिन जनपद पंचायत के वार्ड क्रमांक-1 से जुड़ा हुआ है। यहां से निर्वाचित जनपद सदस्य ऋषिराज मिश्रा के चुनाव को अदालत ने अमान्य घोषित कर दिया।

जस्टिस विशाल मिश्रा ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि कोई प्रत्याशी अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों या अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को छिपाता है, तो यह मतदाताओं को गुमराह करने के समान है। इस मामले में याचिकाकर्ता राकेश पाण्डेय ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में हुए पंचायत चुनाव में रामपुर नैकिन जनपद पंचायत के वार्ड क्रमांक-1 से कई उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था।

आपराधिक केसों की नहीं दी जानकारी
मतगणना के बाद 14 जुलाई 2022 को ऋषिराज मिश्रा को सबसे अधिक वोट मिलने के कारण विजयी घोषित किया गया। चुनाव परिणाम आने के बाद दूसरे स्थान पर रहे राकेश पाण्डेय ने नामांकन पत्र और शपथपत्र की प्रतियां प्राप्त कर उनकी जांच की। दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान यह सामने आया कि निर्वाचित प्रत्याशी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी थी। इसके अलावा उनकी शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी भी सही तरीके से प्रस्तुत नहीं की गई थी।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर दी चुनौती
इन तथ्यों को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता ने अदालत में चुनाव परिणाम को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अधूरी और गलत जानकारी देकर चुनाव जीतना कानून के नियमों के खिलाफ है।  इस मामले को लेकर पंचायत राज से जुड़े कानून के अंतर्गत याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश पंचायत राज एंड ग्राम स्वराज एक्ट 1993 की धारा 122 के तहत चुनाव याचिका प्रस्तुत की और चुनाव परिणाम रद्द करने की मांग की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि प्रत्याशी द्वारा दी गई जानकारी में गंभीर त्रुटियां थीं, जो चुनाव की पारदर्शिता पर असर डालती हैं।

फिर से चुनाव कराने का आदेश
सुनवाई के बाद अदालत ने संबंधित जनपद सदस्य का निर्वाचन रद्द करते हुए उस वार्ड में दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया। यह फैसला पंचायत चुनावों में पारदर्शिता और सही जानकारी देने की अनिवार्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपने आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक जानकारी पूरी ईमानदारी से सार्वजनिक करनी चाहिए। ऐसा नहीं करने की वजह से ही इस मामले में एक निर्वाचित जनपद सदस्य का चुनाव रद्द किया गया है।